चेक बाउंस के एक अहम मामले में रुद्रपुर की अदालत ने आरोपी महिला की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए सख्त संदेश दिया है कि कर्ज चुकाना कानूनी जिम्मेदारी है, इससे बचा नहीं जा सकता।
मामला वर्ष 2018 का है, जब दिनेशपुर निवासी खुशबू ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए किशोर कुमार शर्मा से 3 लाख रुपये उधार लिए थे। इस राशि के भुगतान के लिए उन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा का एक चेक जारी किया। हालांकि, जब परिवादी ने चेक बैंक में प्रस्तुत किया तो वह ‘फंड्स इंसफिशिएंट’ के कारण बाउंस हो गया।
इस मामले में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) रुद्रपुर ने 8 जुलाई 2025 को आरोपी को दोषी ठहराते हुए दो महीने के कारावास और 3 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ दोनों पक्षों ने अपील दायर की। जहां आरोपी ने खुद को निर्दोष बताते हुए सजा रद्द करने की मांग की, वहीं परिवादी ने सजा बढ़ाने की अपील की।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि वास्तविक कर्ज केवल 1 लाख रुपये था और चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था। लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी यह साबित करने में विफल रही कि उसने कर्ज चुका दिया है।
तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश चन्द्र आर्य ने साक्ष्यों के आधार पर निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया और सजा को बरकरार रखा। साथ ही आदेश दिया कि जुर्माने की राशि परिवादी को प्रतिकर के रूप में दी जाए।
यह फैसला वित्तीय अनुशासन और कानूनी जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।
ब्यूरो रिपोर्ट, रुद्रपुर



