नीट काउंसिलिंग में जाति प्रमाणपत्र का खेल, फर्जी नजूल पट्टा लगाकर हासिल किया प्रमाणपत्र, नजूल विभाग की जांच में 1988 का पट्टा निकला कूटरचित

छात्रा और पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज

रुद्रपुर। नीट यूजी-2026 की राज्य केंद्रीकृत काउंसिलिंग में एमबीबीएस/बीडीएस पाठ्यक्रम के लिए चयनित अभ्यर्थियों के अभिलेखों के सत्यापन के दौरान जाति प्रमाणपत्र से जुड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच में जाति प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लगाए गए वर्ष 1988 के नजूल पट्टे का संबंधित विभाग में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। दस्तावेज कूटरचित पाए जाने के बाद राजस्व विभाग ने प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया। अब राजस्व उप निरीक्षक की तहरीर पर पंतनगर थाना पुलिस ने छात्रा और उसके पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

 

मामला वार्ड नंबर एक गोविंद नगर, जगतपुरा निवासी कुमारी आदित्या प्रजापति से जुड़ा है। जिलाधिकारी कार्यालय के निर्देश पर उसके जाति प्रमाणपत्र के अभिलेखों की दोबारा जांच कराई गई। प्रमाणपत्र के लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड, माता का मतदाता पहचान पत्र, स्थानांतरण प्रमाणपत्र, पिता के नाम का विद्युत बिल और वर्ष 1988 में विशेष नजूल अधिकारी रुद्रपुर-नैनीताल कार्यालय से दादा के नाम जारी बताया गया पट्टा लगाया गया था।

 

जांच में आधार कार्ड, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, स्थानांतरण प्रमाणपत्र और विद्युत बिल सही पाए गए। वहीं नजूल पट्टे की संबंधित विभाग से पड़ताल कराई गई तो आवेदक के पिता या दादा के नाम ऐसा कोई पट्टा जारी होने का रिकॉर्ड नहीं मिला। विभागीय जांच में पट्टा कूटरचित और जालसाजी से तैयार किया जाना बताया गया।

 

राजस्व टीम ने मौके पर जाकर भी सत्यापन किया। तहरीर के अनुसार परिवार दिए गए पते पर निवास करता मिला। इसके बाद दो सितंबर 2026 को जारी जाति प्रमाणपत्र को कूटरचित दस्तावेज और भ्रामक तथ्यों के आधार पर जारी मानते हुए निरस्त कर दिया गया। इसकी सूचना जिलाधिकारी कार्यालय को भी भेजी गई। राजस्व उप निरीक्षक अमिन पांडेय की तहरीर पर पुलिस ने आदित्या प्रजापति और उसके पिता सोमपाल सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस अब दस्तावेज तैयार कराने और इस्तेमाल करने से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।