पद्म भूषण से नवाजे गए भगत सिंह कोश्यारी; यहां देखिए राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाली उत्तराखंड की महान विभूतियों की सूची

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उत्तराखंड की राजनीति में ‘भगत दा’ के नाम से पहचान रखने वाले वरिष्ठ नेता, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है. भगत दा के इतिहास पर नजर डालें तो उनका जीवन काफी चुनौतीपूर्ण रहा है. आज भगत दा के साथ-साथ उत्तराखंड की उन हस्तियों के बारे में भी आपको बताते हैं, जिन्होंने देवभूमि का नाम रोशन किया और पद्म भूषण जैसा सम्मान हासिल किया.

पहाड़ के साधारण परिवार में जन्मे भगत दा का सफर: भगत सिंह कोश्यारी ने पहाड़ के एक साधारण परिवार से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई. उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में भगत सिंह कोश्यारी का नाम उन नेताओं में लिया जाता है, जिन्होंने संगठन, विचारधारा और जनसंवाद के बल पर अपनी अलग छवि बनाई. भगत सिंह कोश्यारी का जीवन उत्तराखंड की सामाजिक और राजनीतिक चेतना का एक बड़ा अध्याय माना जाता है. 17 जून 1942 को बागेश्वर जिले के सुदूर गांव पलानधुरा में जन्मे कोश्यारी ने सीमित संसाधनों के बीच अपनी शिक्षा पूरी की. 1964 में उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री पूरी की. छात्र जीवन से ही उनमें नेतृत्व क्षमता दिखाई देने लगी थी. अल्मोड़ा कॉलेज में छात्रसंघ महासचिव रहने के दौरान उन्होंने युवाओं के मुद्दों को मजबूती से उठाया. इसके बाद वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े और फिर जनसंघ तथा भाजपा की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने लगे.

 

राजनीति में आने से पहले भगत दा ने शिक्षक और पत्रकार के रूप में भी काम किया. यही वजह रही कि उनका व्यक्तित्व केवल राजनीतिक मंच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक और वैचारिक क्षेत्र में भी उन्होंने गहरी छाप छोड़ी. उत्तराखंड आंदोलन में निभाई अहम भूमिका: उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान भगत सिंह कोश्यारी उन प्रमुख चेहरों में शामिल रहे, जिन्होंने अलग राज्य की मांग को मजबूती से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया. पहाड़ की भौगोलिक कठिनाइयां, पलायन, बेरोजगारी और विकास की समस्याओं को उन्होंने लगातार राजनीतिक मुद्दा बनाया.

 

आंदोलन के दिनों में वे गांव-गांव जाकर लोगों को जागरुक करते रहे. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की मानें तो उत्तराखंड आंदोलन के वैचारिक आधार को मजबूत करने में भगत दा की महत्वपूर्ण भूमिका रही. राज्य निर्माण के बाद उत्तराखंड की राजनीति में उनकी पकड़ और मजबूत होती चली गई. वे संगठन के ऐसे नेता माने गए, जो कार्यकर्ताओं के बीच सीधा संवाद करते थे. भाजपा संगठन को पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने में भी उनका बड़ा योगदान माना जाता है. यही कारण है कि आज भी उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में उन्हें सम्मान के साथ याद किया जाता है.शिक्षक पत्रकार और वैचारिक लेखक के रूप में भी बनाई पहचान: बहुत कम लोग जानते हैं कि भगत सिंह कोश्यारी केवल राजनेता ही नहीं बल्कि शिक्षक लेखक और पत्रकार भी रहे हैं. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कई संस्थानों से जुड़कर काम किया और पहाड़ में शैक्षणिक वातावरण मजबूत करने में योगदान दिया. साल 1964-1965 के दौरान राजा का रामपुर (एटा, उत्तर प्रदेश) में बतौर लेक्चरर उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की.

 

कोश्यारी ने पिथौरागढ़ में विवेकानंद इंटर कॉलेज की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सरस्वती विहार, नैनीताल से सक्रिय रूप से जुड़े रहे. उन्होंने कई वर्षों तक संघ के विभाग कार्यवाह के रूप में कार्य किया. उसके बाद उत्तरांचल उत्थान परिषद के सचिव बने.

 

वे लंबे समय तक पत्रकारिता से भी जुड़े रहे और पर्वत पीयूष जैसे प्रकाशनों के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाते रहे. उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन और क्षेत्रीय विकास से जुड़े विषयों पर पुस्तकें भी लिखीं. उन्होंने ‘उत्तरांचल प्रदेश क्यों’ और ‘उत्तरांचल प्रदेश: संघर्ष एवं समाधान’ नाम से दो पुस्तकें लिखी और प्रकाशित की हैं. सामाजिक और वैचारिक लेखन में उनकी स्पष्ट सोच दिखाई देती है. यही कारण है कि उन्हें केवल राजनीतिक नेता नहीं बल्कि वैचारिक व्यक्तित्व के रूप में भी देखा जाता है.

 

महाराष्ट्र के राज्यपाल रहते राष्ट्रीय राजनीति की चर्चाओं रहे: भगत सिंह कोश्यारी महाराष्ट्र के राज्यपाल भी रहे हैं. 5 सितंबर 2019 को उन्हें महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया था. महाराष्ट्र जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में उनकी नियुक्ति भाजपा नेतृत्व के भरोसे को दर्शाती थी. राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल कई बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों का गवाह बना. महाराष्ट्र की सत्ता को लेकर हुए घटनाक्रमों के दौरान उनके फैसलों पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस भी हुई. हालांकि, कई मौकों पर विपक्ष ने उनके कुछ बयानों और फैसलों को लेकर आलोचना भी की. इसके अलावा अगस्त 2020 में कोश्यारी को गोवा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था.

 

आपातकाल के दौरान हुए थे गिरफ्तार: देश में लगे राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान कोश्यारी को आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम (मीसा) के तहत गिरफ्तार किया गया था.

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