रुद्रपुर। दि नैनीताल बैंक की सिविल लाइंस शाखा के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर न्यायालय के आदेश के बाद रुद्रपुर कोतवाली में एक फर्म और उसके चार साझेदारों के खिलाफ करोड़ों रुपये के बैंक ऋण में कथित धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और आपराधिक षड्यंत्र का मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में आरोप है कि बैंक के पास बंधक रखी गई प्लांट, मशीनरी और स्टॉक को बिना अनुमति गायब कर दिया गया।
प्रार्थना पत्र के अनुसार वर्ष 2017 में नैनी ऑटो टेक और उसके साझेदारों ने कार्यशील पूंजी, प्लांट एवं मशीनरी की खरीद के लिए कैश क्रेडिट और टर्म लोन सहित करीब 42.62 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। किश्तों का भुगतान बंद होने पर दिसंबर 2019 में सभी ऋण खाते एनपीए घोषित कर दिए गए। इसके बाद बैंक ने सरफेसी अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की और जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय से मार्च 2024 में बंधक संपत्ति पर कब्जा लेने का आदेश प्राप्त किया।
आरोप है कि 18 जून 2024 को बैंक की अधिकृत टीम जब कब्जे की कार्रवाई और बंधक प्लांट, मशीनरी व स्टॉक का सत्यापन करने मौके पर पहुंची तो वहां अधिकांश बंधक संपत्ति मौजूद नहीं मिली। बैंक का आरोप है कि फर्म के साझेदारों ने आपसी साजिश के तहत बैंक की अनुमति के बिना बंधक संपत्ति को हटा दिया, जिससे बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
बैंक प्रबंधन का यह भी कहना है कि अगस्त 2024 में रुद्रपुर कोतवाली और बाद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद वरिष्ठ शाखा प्रबंधक अपूर्व पाण्डेय ने न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में धारा 175(3) बीएनएसएस के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया। न्यायालय के आदेश पर अब रुद्रपुर कोतवाली में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।



