महाबवाल: स्वास्थ्य मंत्री के घर धाक बोल महिला कांग्रेस ने मचाया तांडव, भर्ती विवाद में छात्रा के सुसाइड अटेम्प्ट से सुलगी सूबे की सियासत!

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उत्तराखंड नर्सिंग भर्ती विवाद: आत्महत्या के प्रयास के बाद मंत्री के आवास पर उग्र प्रदर्शन

​देहरादून: उत्तराखंड में नर्सिंग भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहा विवाद बुधवार को एक खौफनाक और उग्र मोड़ पर पहुंच गया। सीनियरिटी (वरिष्ठता) के आधार पर नियुक्ति की मांग कर रही एक महिला नर्सिंग अभ्यर्थी द्वारा आत्महत्या का प्रयास किए जाने की खबर फैलते ही हड़कंप मच गया। इसके तुरंत बाद आक्रोशित महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के आवास का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया।

​आत्मघाती कदम से बढ़ा आक्रोश

जानकारी के अनुसार, लंबे समय से आंदोलनरत एक महिला नर्सिंग अभ्यर्थी ने बुधवार को मानसिक तनाव में आकर आत्मघाती कदम उठा लिया। आनन-फानन में उसे उपचार के लिए देहरादून के दून अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उसे 72 घंटे के गहन पर्यवेक्षण (Observation) में रख रही है। अभ्यर्थी की हालत नाजुक बताई जा रही है।

​इस घटना की सूचना जैसे ही आंदोलनकारी छात्रों और राजनीतिक गलियारों में पहुंची, माहौल पूरी तरह गरमा गया। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिलाएं और नर्सिंग अभ्यर्थी स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के आवास पर पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

​पुलिस के साथ धक्का-मुक्की, कई हिरासत में

मंत्री आवास के बाहर स्थिति को संभालने के लिए पहले से ही भारी पुलिस बल तैनात था। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस व धक्का-मुक्की हुई। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ज्योति रौतेला समेत कई महिला कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया और कोतवाली ले आई।

​क्या है भर्ती विवाद का मुख्य कारण?

उत्तराखंड में नर्सिंग भर्ती का यह विवाद सालों से चला आ रहा है। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार ने पूर्व में वर्ष 2013 तक के अभ्यर्थियों को सीनियरिटी (वर्षवार योग्यता) के आधार पर नियुक्तियां दी थीं। इसके बाद नियमावली में बदलाव कर भर्ती परीक्षा को अनिवार्य कर दिया गया।

​आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का तर्क है कि जब एक बार सीनियरिटी को आधार मानकर 2013 तक के बैच को लाभ दिया जा चुका है, तो उसके बाद के अभ्यर्थियों के लिए नियम बदलना अन्यायपूर्ण है। वहीं दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि परीक्षा के माध्यम से भर्ती करना पूरी तरह पारदर्शी और योग्यता पर आधारित प्रणाली है।

​सरकार के सामने बड़ी चुनौती

महिला अभ्यर्थी के इस कदम ने शासन-प्रशासन की नींद उड़ा दी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द ही नियमावली में संशोधन कर सीनियरिटी के आधार पर पद नहीं भरे, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप धारण करेगा। फिलहाल, सरकार के सामने छात्रों के बढ़ते आक्रोश को शांत करने और विवाद का कोई स्थायी समाधान निकालने की कठिन चुनौती बनी हुई है।

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