सात अक्तूबर 2022 को मिली थी रिंकी की मौत की खबर; अदालत में 15 गवाहों ने दी गवाही
रुद्रपुर। दहेज के लिए पत्नी को प्रताड़ित करने और उसकी मौत के मामले में अदालत ने पति शिशुपाल को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष 15 गवाह पेश किए। मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुनाया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, गांव जटपुरा न्यूरिया, पीलीभीत निवासी रामविलास ने सात अक्तूबर 2022 को मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में उनकी बेटी रिंकी की शादी गांव कमुआ, हाफिजगंज, बरेली निवासी शिशुपाल के साथ हुई थी। शादी के कुछ माह बाद ही पति शिशुपाल और ससुराल के अन्य लोग रिंकी को प्रताड़ित करने लगे। आरोप था कि उस पर मायके से दो लाख रुपये नकद लाने का दबाव बनाया जाता था।
परिजनों के मुताबिक, दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर रिंकी के साथ कई बार बेरहमी से मारपीट की गई और उसे घर से बाहर तक निकाल दिया गया। परिवार ने मामले को सुलझाने का प्रयास किया। वर्ष 2022 में पुलिस की मौजूदगी में लिखित समझौता हुआ, जिसके बाद रिंकी और शिशुपाल कोतवाली ट्रांजिट कैंप क्षेत्र के आजाद नगर में आकर रहने लगे।
अभियोजन के अनुसार, इसके बावजूद विवाद थमा नहीं। सात अक्तूबर 2022 को रामविलास को सूचना मिली कि उनकी बेटी रिंकी की मौत हो गई है। सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। मामले में पुलिस ने दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कर विवेचना के बाद आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया।
सुनवाई के दौरान एडीजीसी ने अभियोजन की ओर से 15 गवाह पेश किए। मेडिकल रिपोर्ट समेत अन्य साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को अदालत के समक्ष रखा गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पति शिशुपाल को दहेज मृत्यु के मामले में दोषी माना और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।




