देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कांग्रेस के दो संगठनात्मक पदों से हटने का ऐलान किया है। शुक्रवार को उनके पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के घर ईडी की कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई। इसके बाद देर रात हरीश रावत ने इंटरनेट मीडिया पर लंबी पोस्ट जारी कर अपने फैसले की जानकारी दी। विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले उनके संगठनात्मक पद छोड़ने के ऐलान को राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में कहा कि टेलीविजन पर देहरादून में उनके पूर्व ओएसडी के यहां भारी मात्रा में नकदी और जेवरात मिलने की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वास्तविक तथ्य आने वाले समय में स्पष्ट होंगे। रावत ने स्वीकार किया कि जीना उनके ओएसडी रहे हैं और सरकार व पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ के आरोपों पर अविश्वास जताया।
रावत ने कहा कि यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ या किसी अन्य तरह की गलती के प्रमाण सामने आते हैं तो वह ऐसे कृत्य के लिए स्वयं को शर्मिंदा मानेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के आगामी चुनाव में बड़े राजनीतिक दांव लगे हैं और उनकी वजह से कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष को कोई कमजोरी नहीं आनी चाहिए।
इसी कारण उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि वह किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, इसलिए संगठनात्मक पदों से हटकर पार्टी के संघर्ष को मजबूती देना चाहते हैं।
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को लेकर रावत ने अपने कार्यकाल का बचाव करते हुए कहा कि आयोग का गठन प्रदेश के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था। उन्होंने दावा किया कि उनके तीन वर्ष के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां हुईं। साथ ही उन्होंने कहा कि नियुक्तियों की प्रक्रिया में यदि उनसे जाने-अनजाने कोई चूक हुई है तो वह प्रदेश के लोगों से क्षमा मांगते हैं।
रावत ने कहा कि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति उनके पिछले सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी और इस संबंध में तत्कालीन मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी से भी प्रभावी सलाह मिली थी। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के भविष्य में गलत आचरण करने का अनुमान पहले से लगाना संभव नहीं होता।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक अपील करते हुए कहा कि यदि भर्ती और नियुक्तियों में उनके हस्तक्षेप या संलिप्तता से जुड़े कोई प्रमाण किसी के पास हैं तो उन्हें सीबीआई, ईडी अथवा राज्य पुलिस को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बड़े दायित्व संभालने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भ्रष्ट प्रलोभनों से बचना चाहिए और यदि उनसे कोई चूक हुई है तो कानून उन्हें दंडित करे।
