रुद्रपुर। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष पॉक्सो कोर्ट संगीता आर्य की अदालत ने नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मामले में बच्चे और आरोपी की डीएनए रिपोर्ट अहम साक्ष्य बनी।
अभियोजन के अनुसार, 12 अप्रैल 2019 को ट्रांजिट कैंप थाना क्षेत्र की रहने वाली 17 वर्ष 10 माह 28 दिन की किशोरी अपनी मां के साथ अस्पताल से दवा लेकर घर लौट रही थी। इसी दौरान किच्छा की बंगाली कॉलोनी निवासी गुड्डू पुत्र नरोत्तम उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। आरोपी किशोरी को दिल्ली होते हुए गुजरात के सूरत ले गया। वहां उसने किशोरी को अपने कब्जे में रखकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
किशोरी के घर नहीं लौटने पर परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पिता की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। एसओजी ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से आरोपी की लोकेशन सूरत में ट्रेस की। सितंबर 2019 में पुलिस टीम ने सूरत में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और किशोरी को बरामद कर परिजनों के सुपुर्द किया।
बरामदगी के बाद किशोरी ने एक बच्चे को जन्म दिया। पुलिस ने आरोपी और बच्चे के डीएनए नमूने लेकर एफएसएल देहरादून भेजे। जांच में दोनों का जैविक संबंध सामने आया। अभियोजन ने इसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में अदालत के समक्ष रखा।
अदालत ने धारा 6 पॉक्सो एक्ट में 20 वर्ष का कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना, धारा 366 आईपीसी में 10 वर्ष का कठोर कारावास व पांच हजार रुपये तथा धारा 363 आईपीसी में सात वर्ष का कठोर कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए राज्य की पीड़ित सहायता योजना के तहत एक लाख रुपये प्रतिकर देने के आदेश दिए हैं। साथ ही जुर्माने की राशि में से 30 हजार रुपये पीड़िता को देने के निर्देश दिए गए हैं।
