किच्छा-सिरौली कलां में तीन हफ्ते में होगी मतगणना, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया समय, 22 सितंबर को मतदान के बाद मतपेटियों में बंद है प्रत्याशियों का भाग्य

नैनीताल। किच्छा और सिरौली कलां नगर पालिका चुनाव के बाद मतगणना नहीं कराए जाने के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर मतगणना कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने बुधवार को राज्य सरकार के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

 

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर मतगणना कराने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए समय मांगा गया था। सरकार की ओर से बताया गया कि 22 सितंबर को मतदान के दौरान बूथों पर हंगामा हुआ था। मतदान के बाद मतपेटियों को स्ट्रांग रूम में रखने के दौरान भी विवाद की स्थिति बनी थी। ऐसे में मतगणना के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैयारी की जरूरत है। सरकार ने दो सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन कोर्ट ने तीन सप्ताह का समय दिया।

 

मतदान के बाद से मतपेटियों में बंद है परिणाम

 

किच्छा और सिरौली कलां नगर पालिका में 22 सितंबर को मतदान हो चुका है। इसके बाद प्रत्याशियों और समर्थकों की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं, लेकिन राज्य चुनाव आयोग के आदेश के चलते परिणाम घोषित नहीं किया गया। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने मतगणना रोकने संबंधी आदेश पर रोक लगाते हुए सवाल किया था कि जब मतदान हो चुका है तो मतगणना क्यों रोकी गई है। कोर्ट ने मतगणना जल्द कराने के निर्देश दिए थे।

 

स्ट्रांग रूम के बाहर हुआ था विवाद

 

मतदान के बाद स्ट्रांग रूम के बाहर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विवाद बढ़ गया था। तिरपाल लगाए जाने के विरोध में किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ धरने पर बैठ गए थे। कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह भी समर्थकों के साथ धरने में शामिल हुए। इसी दौरान पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के पहुंचने के बाद दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक हुई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस बल तैनात किया गया और विधायक तिलक राज बेहड़ व पूर्व विधायक राजेश शुक्ला को हिरासत में लिया गया था।

 

चुनाव को लेकर पहले भी हाईकोर्ट पहुंचा था मामला

 

किच्छा निवासी अलीना मलिक समेत अन्य की ओर से मतगणना कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। इससे पहले किच्छा नगर पालिका के चुनाव और अध्यक्ष पद के आरक्षण को लेकर भी मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। वहीं नवगठित सिरौली कलां नगर पालिका में चुनाव नहीं कराने को लेकर भी याचिकाएं दायर की गई थीं। कोर्ट के आदेशों के बाद दोनों नगर पालिकाओं में 22 सितंबर को मतदान कराया गया, लेकिन मतगणना स्थगित कर दी गई थी। अब खंडपीठ के आदेश के बाद तीन सप्ताह के भीतर दोनों निकायों के चुनाव परिणाम सामने आने का रास्ता साफ हो गया है।