तीन लाख का चेक बाउंस, तीन माह की जेल पर अदालत की मुहर, अभियुक्त की अपील खारिज, 3.10 लाख रुपये जुर्माना भी बरकरार; हस्ताक्षर स्वीकार करना पड़ा भारी

रुद्रपुर। तीन लाख रुपये का चेक बाउंस होने के मामले में अभियुक्त प्रेमपाल को निचली अदालत से मिली तीन माह के साधारण कारावास की सजा से राहत नहीं मिली। प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरके श्रीवास्तव की अदालत ने उसकी अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने अभियुक्त को विचारण न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करने के निर्देश भी दिए हैं।

 

मामला रुद्रपुर की इंद्रा कॉलोनी का है। पंकज प्रजापति के अनुसार प्रेमपाल ने नवंबर 2021 में कारोबारी जरूरत के लिए उससे 3.23 लाख रुपये उधार लिए थे। प्रेमपाल ने 22,774 रुपये गूगल-पे के माध्यम से वापस कर दिए, जबकि बाकी तीन लाख रुपये लौटाने के लिए पंजाब नेशनल बैंक का चेक दिया।

 

पंकज ने चेक भुगतान के लिए बैंक में लगाया तो खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण चेक ‘फंड इंसफिशिएंट’ की रिपोर्ट के साथ बाउंस हो गया। रकम वापस पाने के लिए परिवादी ने नियमानुसार प्रेमपाल को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद पंकज ने न्यायालय में परिवाद दाखिल किया।

 

मामले की सुनवाई के बाद विचारण न्यायालय ने 21 नवंबर 2025 को प्रेमपाल को एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने तीन माह के साधारण कारावास के साथ 3.10 लाख रुपये जुर्माना लगाया था। इसमें तीन लाख रुपये परिवादी को क्षतिपूर्ति के रूप में और 10 हजार रुपये राज्य कोष में जमा कराने के आदेश दिए गए थे।

 

इस फैसले को प्रेमपाल ने सत्र न्यायालय में चुनौती दी। अपील पर सुनवाई के दौरान प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पत्रावली में मौजूद साक्ष्यों और सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्थाओं का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि अभियुक्त ने चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात स्वीकार की है। उपलब्ध साक्ष्यों में निचली अदालत के फैसले में कोई कानूनी त्रुटि नहीं मिली। इसके बाद अदालत ने अपील पूरी तरह खारिज कर दी और पूर्व सजा को बरकरार रखते हुए अभियुक्त को विचारण न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए।