रुद्रपुर। फोन की घंटी बजी और दूसरी तरफ से खुद को टेलीकॉम रेग्यूलेटरी विभाग का अधिकारी बताने वाला शख्स था। इसके बाद शुरू हुआ डर और धोखे का ऐसा खेल, जिसने अल्मोड़ा की एक वरिष्ठ नागरिक को 12 दिन तक घर में ही डिजिटल कैद में रखा। कभी खाते में 60 करोड़ की मनी लांड्रिंग बताई गई तो कभी पांच हजार लोगों से लेनदेन और पांच हजार एफआईआर का खौफ दिखाया गया। कानूनी कार्रवाई से बचने के नाम पर साइबर ठगों ने पीड़िता से 1.20 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए।
मामले की शिकायत जनवरी में मिलने के बाद उत्तराखंड एसटीएफ के साइबर थाना कुमाऊं परिक्षेत्र ने जांच शुरू की। साइबर टीम ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और व्हाट्सएप से जुड़े तकनीकी साक्ष्य खंगाले। बैंकों, मोबाइल सेवा प्रदाताओं और मेटा से मिले डाटा की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस मालदा, पश्चिम बंगाल तक पहुंची।
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम जिन खातों में पहुंची, उनमें शान्तनु दास पुत्र समीर कुमार दास, निवासी गोपालपुर, थाना इंग्लिश बाजार, मालदा का खाता भी शामिल था। पुलिस ने आरोपी को मालदा से गिरफ्तार कर लिया।
ऐसे बिछाया जाल
दिसंबर में पीड़िता को व्हाट्सएप कॉल की गई। कॉलर ने खुद को टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताया और दावा किया कि उसके आधार कार्ड से जुड़े केनरा बैंक खाते में मनी लांड्रिंग के तहत 60 करोड़ रुपये आए हैं। इसके बाद पांच हजार लोगों द्वारा रकम ट्रांसफर करने और पीड़िता के खिलाफ पांच हजार एफआईआर दर्ज होने की बात कही गई।
डर का माहौल बनाने के बाद पीड़िता को किसी से संपर्क नहीं करने दिया गया। बैंक खातों के सत्यापन के नाम पर लगातार व्हाट्सएप कॉल पर रखा गया और अलग-अलग खातों में रकम जमा कराने के लिए मजबूर किया गया। 12 दिन में 1,20,18,000 रुपये ठग लिए गए। रकम पहुंचते ही उसे दूसरे खातों में खिसकाया जाता रहा।
एसटीएफ के मुताबिक आरोपी के खाते में ठगी की पूरी रकम पहुंची थी। गिरोह के अन्य सदस्यों और रकम के लेनदेन की जांच जारी है।
एसटीएफ की अपील: किसी भी कॉल पर डरकर पैसे ट्रांसफर न करें। साइबर ठगी होते ही तत्काल 1930 पर शिकायत करें।
