नौ साल पुराने स्मैक मामले में महिला तस्कर को सजा, 7.14 ग्राम स्मैक, इलेक्ट्रॉनिक तराजू और पैकिंग सामग्री हुई थी बरामद; कोर्ट ने लगाया 15 हजार रुपये का जुर्माना

काशीपुर। करीब नौ साल पुराने स्मैक तस्करी के मामले में विशेष एनडीपीएस अदालत ने 58 वर्षीय महिला जरीना को दोषी करार देते हुए 17 दिन के सश्रम कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर दोषी को चार दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अदालत ने विचारण और जांच के दौरान जेल में बिताई अवधि को सजा में समायोजित करने के निर्देश दिए हैं।

 

मामला चार जनवरी 2017 का है। पुलिस के अनुसार काशीपुर चौकी बांसफोड़ान के उपनिरीक्षक जसविंदर सिंह टीम के साथ गश्त कर रहे थे। चुंगी मोड़ बांसफोड़ान के पास पुलिस को देखकर बुर्का पहने एक महिला दूसरी दिशा में तेजी से जाने लगी। संदेह होने पर महिला पुलिसकर्मियों ने पीछा कर करीब 30 मीटर दूर अल्ली खां रोड पर उसे पकड़ लिया।

 

पूछताछ के बाद महिला की तलाशी लेने पर उसके पास से 7.14 ग्राम स्मैक बरामद हुई। इसके अलावा एक इलेक्ट्रॉनिक तराजू, 50 कागज की पुड़िया, स्टेपलर और पिन बरामद किए गए। मामले में थाना काशीपुर में एफआईआर संख्या 08/2017 के तहत एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/22 में मुकदमा दर्ज किया गया था।

 

विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस दीपाली शर्मा की अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन ने पुलिसकर्मियों के बयान और बरामदगी से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए। विचारण के दौरान जरीना ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर अपना अपराध स्वीकार किया।

 

सजा के प्रश्न पर बचाव पक्ष ने महिला की उम्र, आर्थिक स्थिति और पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं होने का हवाला देते हुए नरमी बरतने की मांग की। अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए 17 दिन के सश्रम कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।