धारा 323 में अदालत उठने तक की सजा; गंभीर चोट, गाली-गलौज और धमकी के आरोपों से हुए बरी
रुद्रपुर। सिडकुल क्षेत्र में आठ साल पहले हुए मारपीट और हमला मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) हेमंत सिंह की अदालत ने दो सगे भाइयों को मारपीट का दोषी करार दिया है। अदालत ने अमेठी निवासी शाहिद आलम और अब्दुल माजिद को धारा 323 के तहत दोषसिद्ध करते हुए अदालत उठने तक की सजा और एक-एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। दोनों ने जुर्माने की राशि अदालत में जमा कर दी।
अभियोजन के अनुसार 14 अक्टूबर 2016 की रात करीब 8:30 बजे ट्रांजिट कैंप थाना क्षेत्र स्थित राजस्थान एमपी ट्रांसपोर्ट कार्यालय में ट्रक चालक अब्दुल हुसैन और उनके मामा दिलशेर खान सिडकुल में माल उतारने के बाद सो रहे थे। आरोप था कि इसी दौरान शाहिद आलम, अब्दुल माजिद और उनके साथी वहां पहुंचे और लोहे की रॉड व सरियों से दोनों पर हमला कर दिया। घटना में अब्दुल हुसैन के सिर में चोट आई थी, जबकि दिलशेर खान भी घायल हुए थे।
बताया गया कि विवाद की शुरुआत फरीदाबाद में पीड़ित पक्ष के ट्रक चालक को जबरन वाहन से उतारने को लेकर हुई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने वादी, पीड़ित, विवेचक और चिकित्सक समेत चार गवाह पेश किए।
बचाव पक्ष ने घटना के बाद कार्रवाई में हुए लंबे विलंब और गवाहों के बयानों में विरोधाभास का तर्क दिया। हालांकि अदालत ने माना कि लंबे समय के अंतराल के कारण मामूली विसंगतियां स्वाभाविक हैं।
वहीं, धारा 325 के तहत गंभीर चोट, धारा 504 में गाली-गलौज और धारा 506 में धमकी के आरोप पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में साबित नहीं हो सके। सीटी स्कैन व एक्स-रे रिपोर्ट तथा गाली-गलौज के विशिष्ट उल्लेख के अभाव में अदालत ने दोनों आरोपियों को इन धाराओं से बरी कर दिया। जुर्माना अदा नहीं करने पर पांच दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
