मुद्रा योजना का ऋण नहीं चुकाने पर मेडिकल स्टोर संचालक को झटका -अदालत का केनरा बैंक के पक्ष में एकपक्षीय आदेश, 80,671 रुपये के साथ पांच हजार रुपये वाद व्यय भी देना होगा

रुद्रपुर। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत बैंक से लिया गया ऋण नही चुकाने पर मेडिकल स्टोर संचालक को अब बकाया रकम के साथ ब्याज भी चुकाना होगा। केनरा बैंक की ओर से दायर धन वसूली के मुकदमे में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालत ने प्रतिवादी के खिलाफ एकपक्षीय निर्णय सुनाया है। अदालत ने मैसर्स जयगुरु मेडिकल स्टोर के प्रोपराइटर उदय कुमार को 80,671 रुपये की बकाया धनराशि और पांच हजार रुपये वाद व्यय के रूप में अदा करने का आदेश दिया है। साथ ही निर्णय की तारीख से वास्तविक भुगतान होने तक 8.25 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज भी देना होगा।

 

केनरा बैंक की दुर्गापुरी दिनेशपुर शाखा के प्रबंधक संजीत कुमार की ओर से यह वाद दायर किया गया था। वाद के अनुसार, ग्राम धर्मनगर, खानपुर, रुद्रपुर निवासी उदय कुमार ने मेडिकल स्टोर के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत एमएसएमई ऋण लिया था। बैंक ने 15 फरवरी 2020 को 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर एक लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया था। इसके बदले मेडिकल स्टोर के व्यावसायिक स्टॉक को बैंक के पक्ष में बंधक रखा गया था।

 

बैंक के अनुसार, ऋण लेने के बाद निर्धारित समय पर बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया। पर्याप्त अवसर देने के बावजूद रकम जमा नहीं होने पर बैंक ने ऋण खाते को एनपीए घोषित कर दिया। इसके बाद बैंक के अधिवक्ता गुरबाज सिंह के माध्यम से 19 अगस्त 2025 को कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। एक जुलाई 2025 तक खाते में 80,671 रुपये बकाया हो गए थे।

 

समन के बाद भी अदालत में नहीं हुए पेश

 

वाद दायर होने के बाद प्रतिवादी को समन भेजे गए, लेकिन वह न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। इसके चलते 17 अगस्त 2026 को एकपक्षीय कार्रवाई की गई। बैंक की ओर से शाखा प्रबंधक का शपथपत्र और ऋण आवेदन, हाइपोथिकेशन एग्रीमेंट समेत अन्य दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) प्रतीक मथेला की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर 17 अक्टूबर 2026 को बैंक के पक्ष में वाद डिक्री कर दिया। अदालत के आदेश के अनुसार, प्रतिवादी को बकाया राशि, वाद व्यय और निर्धारित दर से ब्याज का भुगतान करना होगा।