मोबाइल लूट कांड में सात साल बाद आरोपी बरी, पुलिस और पीड़िता के बयान में टकराव बना केस की सबसे बड़ी कमजोरी

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-पहचान परेड न होने पर अदालत ने उठाए सवाल

संवाददाता, रुद्रपुर।

सात साल पुराने चर्चित मोबाइल लूट कांड में अदालत ने पुलिस विवेचना पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हेमंत सिंह की अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।

मामला 18 अप्रैल 2019 का है। उस समय ग्राम पंचायत विकास अधिकारी पूनम पनेरू रुद्रपुर ब्लॉक रोड पर रिक्शे से जा रही थीं। आरोप था कि बाइक सवार बदमाशों ने मारपीट कर उनका वीवो मोबाइल लूट लिया। पुलिस ने ठाकुरनगर निवासी सुनील राजपूत समेत तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की थी।

सुनवाई के दौरान मामला उस समय पलट गया जब पीड़िता की गवाही पुलिस की कहानी से मेल नहीं खाई। अदालत में पूनम पनेरू ने बयान दिया कि घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने बदमाशों को मौके पर ही पकड़ लिया था और पुलिस के हवाले कर दिया था। वहीं बरामदगी दिखाने वाले तत्कालीन दरोगा कमलेश भट्ट ने अदालत को बताया कि आरोपी अगले दिन मुखबिर की सूचना पर रामपुर बॉर्डर के पास पकड़े गए।

अदालत ने दोनों बयानों में भारी विरोधाभास मानते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। न्यायालय ने यह भी कहा कि आरोपी की कानूनी पहचान परेड नहीं कराई गई, जो विवेचना की बड़ी कमी है। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी सुनील राजपूत को धारा 392, 411 और 120बी भादंसं के आरोपों से संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

मामले के दो अन्य आरोपी राजू मंडल और राजदत्त उर्फ शंकू पहले ही अदालत में जुर्म कबूल कर चुके थे।

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