हाईकोर्ट से छात्रसंघ चुनाव में 50% आरक्षण को हरी झंडी, छात्रों की याचिकाएं खारिज, सरकार के शासनादेश को चुनौती देने वाले दावे नहीं माने गए

नैनीताल। उत्तराखंड में छात्रसंघ चुनाव में छात्राओं के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित करने के राज्य सरकार के फैसले को लेकर चल रहे विवाद पर हाईकोर्ट ने स्थिति साफ कर दी है। न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी की एकलपीठ ने सरकार के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। इसके साथ ही छात्रसंघ चुनाव में 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू रहने का रास्ता साफ हो गया। राज्य सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से छात्रसंघ चुनाव में छात्राओं के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित करने का निर्णय लिया था।

मामले के अनुसार रामनगर और हल्द्वानी महाविद्यालय के छात्र भरत केशवानी, मानस आर्य समेत अन्य छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर शासनादेश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि राज्य सरकार को छात्रसंघ चुनाव में आरक्षण निर्धारित करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने शासनादेश को नियमों के विपरीत बताते हुए निरस्त करने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने पक्ष रखा। सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार को छात्रसंघ चुनाव में प्रतिनिधित्व के संबंध में निर्णय लेने की शक्ति प्राप्त है। इसी आधार पर याचिकाओं की पोषणीयता पर भी आपत्ति उठाई गई।

सभी पक्षों को सुनने के बाद एकलपीठ ने याचिकाएं खारिज कर दीं। ऐसे में प्रदेश के विश्वविद्यालयों और संबद्ध महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव 50 प्रतिशत महिला आरक्षण की व्यवस्था के तहत ही आगे बढ़ेंगे। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने भी 2026-27 के चुनावों में 50 प्रतिशत पद छात्राओं के लिए आरक्षित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।