नैनीताल। टिहरी गढ़वाल में मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की तलवार से हत्या करने के मामले में दोषी संजय सिंह की फांसी की सजा पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रखा।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एम्स के चिकित्सकों की रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट के अनुसार आरोपी को उसकी मानसिक स्थिति के आकलन के लिए एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों को दिखाया गया था। उपचार के बाद उसकी मानसिक स्थिति में काफी सुधार बताया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वह बिना किसी सहायता के संवाद करने में सक्षम है।
वहीं आरोपी की ओर से दलील दी गई कि घटना के समय उसकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी। यह भी कहा गया कि निचली अदालत ने मृत्युदंड सुनाने से पहले उसकी मानसिक स्थिति की समुचित जांच नहीं कराई।
मामले के अनुसार टिहरी गढ़वाल के गुमाल गांव निवासी संजय सिंह ने 13 दिसंबर 2014 को अपनी मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की तलवार से हत्या कर दी थी। घटना की रिपोर्ट आरोपी के पिता राम सिंह पंवार ने दर्ज कराई थी।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमा पांडेय की अदालत ने अगस्त 2021 में संजय सिंह को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। आरोपी ने सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद वशिष्ठ को न्याय मित्र नियुक्त किया था।
न्याय मित्र ने अदालत को बताया कि मेडिकल बोर्ड ने आरोपी को मानसिक रूप से बीमार बताया था और उसके अनुसार वह अपने कृत्य के परिणामों को समझने की स्थिति में नहीं था। हालांकि उपचार के बाद सुधार की संभावना बताई गई थी। इस आधार पर मृत्युदंड पर पुनर्विचार की मांग की गई।
