इलाज में देरी या लापरवाही? अधिवक्ता की मौत के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, तीन घंटे तक अस्पताल न पहुंचाने के आरोप से सिस्टम कठघरे में

Share the news

नैनीताल, संवाददाता। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर की पार्किंग में सोमवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां जिला बार के अधिवक्ता पूरन सिंह भाकुनी ने कथित रूप से आत्मघाती कदम उठाते हुए खुद को गोली मार ली। घटना से पूरे अधिवक्ता समुदाय में शोक और आक्रोश का माहौल है।

जानकारी के अनुसार, पार्किंग संचालक सागर आर्य को एक पर्यटक ने कार के अंदर बैठे व्यक्ति के कान से खून बहने की सूचना दी। मौके पर पहुंचने पर अधिवक्ता अचेत अवस्था में मिले। सूचना पर पुलिस पहुंची और कार के भीतर से उनका शव बरामद किया। घटनास्थल से एक पिस्टल और डैशबोर्ड में रखा सुसाइड नोट भी मिला है। नोट में कुछ व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख करते हुए कुमाऊं आयुक्त, जिलाधिकारी और एसएसपी से उनकी पत्नी का ख्याल रखने की अपील की गई है।

मामले में सीओ सिटी अंजना नेगी ने बताया कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और फोरेंसिक टीम से जांच कराई जा रही है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है तथा मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।

हालांकि इस घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि घटना के बाद करीब तीन घंटे तक घायल अधिवक्ता को अस्पताल नहीं पहुंचाया गया और न ही मौके पर तुरंत डॉक्टरों को बुलाया गया। मृतक की पत्नी मौके पर मौजूद रहीं और इलाज की गुहार लगाती रहीं, लेकिन कथित रूप से उनकी बातों को अनसुना किया गया।

बताया गया कि हंगामे के बाद करीब दोपहर 2 बजे बीडी पांडे अस्पताल से एंबुलेंस मौके पर पहुंची। अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अनिरुद्ध गंगोला के अनुसार उन्हें लगभग 1:30 बजे सूचना मिली और मौके पर पहुंचने तक अधिवक्ता की मृत्यु हो चुकी थी।

घटना को लेकर अधिवक्ताओं में रोष व्याप्त है। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ज्योति प्रकाश ने कहा कि सुबह करीब 9:30 बजे के बाद घटना हुई, ऐसे में पुलिस को घायल अवस्था में अधिवक्ता को तत्काल अस्पताल पहुंचाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि किसी को मृत घोषित करने का अधिकार पुलिस को नहीं, बल्कि डॉक्टर को होता है।

हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुभाष जोशी ने भी पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि समय पर प्राथमिक उपचार मिलता तो शायद जान बचाई जा सकती थी। वहीं शासकीय अधिवक्ता सुशील शर्मा ने कहा कि सूचना मिलने के बावजूद पुलिस की प्रतिक्रिया में देरी हुई, जिससे हालात और गंभीर हो गए।

बताया जा रहा है कि अधिवक्ता पूरन सिंह भाकुनी पिछले कुछ समय से निजी कारणों और मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। अधिवक्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *