राजाजी टाइगर रिजर्व में VIP शादी पर घमासान, बिना अनुमति आयोजन उजागर, मंत्री खजानदास घिरे सवालों में, वन विभाग ने मंदिर समिति पर केस दर्ज, कर्मचारियों से जवाब तलब

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देहरादून/हरिद्वार, संवाददाता। राजाजी टाइगर रिजर्व के संवेदनशील कोर जोन में आयोजित कथित ‘VIP शादी’ का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। कैबिनेट मंत्री खजानदास के बेटे की शादी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब जांच और कार्रवाई के दायरे में आ चुका है। जांच में सामने आया है कि इस आयोजन के लिए कोई लिखित अनुमति नहीं ली गई थी।

जानकारी के अनुसार, कोर जोन में बड़े स्तर पर टेंट, सजावट और अन्य व्यवस्थाएं की गई थीं, जबकि इस क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण के कड़े नियम लागू होते हैं। बिना अनुमति इस तरह का आयोजन नियमों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है। मामला सामने आने के बाद वन विभाग हरकत में आया और तत्काल कार्रवाई करते हुए आयोजन से जुड़े टेंट व अन्य सामग्री हटवाई गई। दबाव बढ़ने पर शादी को सीमित दायरे में संपन्न कराया गया।

वन विभाग ने प्रथम चरण में सुरेश्वरी देवी मंदिर समिति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि आयोजन के लिए स्थान उपलब्ध कराने में समिति की भूमिका रही। इसके साथ ही विभाग ने अपने कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है।

सूत्रों के अनुसार, रेंजर, फॉरेस्टर और फॉरेस्ट गार्ड सहित कई कर्मियों से जवाब तलब किया गया है। उनसे पूछा गया है कि आखिर इतने संवेदनशील क्षेत्र में बिना अनुमति इतना बड़ा आयोजन कैसे शुरू हो गया और विभाग को इसकी समय पर जानकारी क्यों नहीं मिली। विभागीय स्तर पर लापरवाही या संभावित मिलीभगत की भी जांच की जा रही है।

मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए संबंधित एसडीओ को निर्देश दिए गए हैं, जो सभी पक्षों के जवाब और अपनी टिप्पणियों के साथ रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपेंगे। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

मुख्य वन संरक्षक राजीव धीमान ने कहा कि प्रकरण को गंभीरता से लिया गया है और सभी संबंधितों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि राजाजी टाइगर रिजर्व पहले भी विवादों में रहा है, लेकिन इस बार मामला एक मंत्री के परिवार से जुड़ा होने के कारण अधिक संवेदनशील बन गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि कोर जोन में इस तरह के आयोजनों से वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार पर असर पड़ता है और संरक्षण प्रयासों को नुकसान पहुंच सकता है।

फिलहाल, पूरे मामले में वन विभाग की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं कि क्या जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होती है या मामला औपचारिकताओं तक सीमित रह जाता है।

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