35 साल बाद फिर गूंजेगी पाठशाला: गुंजी में स्कूल पुनर्जीवित, भारतीय सेना की पहल से सीमांत गांव में लौटी शिक्षा की रोशनी, अब बच्चों के इंतजार में तैयार आधुनिक विद्यालय

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पिथौरागढ़, उत्तराखंड।

भारत-चीन सीमा के पास बसे सीमांत गांव गुंजी में 35 साल से बंद पड़ा प्राथमिक विद्यालय अब फिर से आबाद होने जा रहा है। कभी वीरान पड़ी इस पाठशाला में जल्द ही बच्चों की किलकारियां और ‘अ, आ, इ, ई’ की आवाजें गूंजती नजर आएंगी। यह बदलाव Indian Army की पहल से संभव हो पाया है, जिसने ऑपरेशन सद्भावना के तहत स्कूल का पुनर्निर्माण कराया है।

Gunji village में स्थित यह प्राथमिक विद्यालय करीब 35 साल पहले बंद हो गया था। वर्ष 1995 में दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और लगातार पलायन के चलते यहां बच्चों की संख्या घटती चली गई, जिसके बाद स्कूल को बंद करना पड़ा। इसके बाद शिक्षा का यह केंद्र पूरी तरह वीरान हो गया था।

हालांकि, हाल के वर्षों में आदि कैलाश और ॐ पर्वत तक सड़क संपर्क बेहतर होने से इस इलाके में आवाजाही बढ़ी है और धीरे-धीरे रिवर्स पलायन भी शुरू हुआ है। इसी को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने स्कूल को फिर से शुरू करने की मांग उठाई। पूर्व प्रधान सुरेश गुंज्याल और सरपंच लक्ष्मी गुंज्याल ने सेना के अधिकारियों के सामने इस मुद्दे को प्रमुखता से रखा।

मांग पर कार्रवाई करते हुए भारतीय सेना ने करीब 72 लाख रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं से लैस नया विद्यालय भवन तैयार कराया है। यह स्कूल 75 बच्चों की क्षमता वाला है, जिसमें तीन कक्षाएं, एक बड़ा हॉल, स्टाफ रूम और गार्ड रूम बनाए गए हैं। इसके साथ ही बच्चों के खेलने के लिए पार्क और कंप्यूटर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस स्कूल से पढ़कर कई छात्र पहले भी प्रशासनिक सेवाओं में उच्च पदों तक पहुंचे हैं, जिनमें मुख्य सचिव और जिलाधिकारी जैसे पद शामिल हैं। ऐसे में स्कूल का पुनर्जीवन सीमांत क्षेत्र के लिए नई उम्मीद लेकर आया है।

सेना के अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सिर्फ शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के साथ संबंध मजबूत करना भी है। खासकर गर्मियों के छह महीनों में यहां रहने वाले बच्चों को शिक्षा का लाभ मिल सकेगा।

हालांकि, स्कूल शुरू होने के लिए अभी कम से कम 10 बच्चों का नामांकन जरूरी है। खंड शिक्षाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि न्यूनतम संख्या पूरी होते ही शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।

ग्राम प्रधान विमला गुंज्याल ने स्कूल के पुनर्निर्माण पर सेना का आभार जताते हुए कहा कि यह कदम सीमांत क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कब यह स्कूल फिर से बच्चों से भर जाएगा और शिक्षा की नई कहानी लिखेगा।

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