भैंस चोरी के मामले में न्याय न मिलने से क्षुब्ध किसान ने कोतवाली में निगला जहर, चोरी गई तीन भैंसों की बरामदगी न होने से था परेशान, परिजनों ने चौकी प्रभारी पर लगाए गंभीर आरोप

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गदरपुर। भैंस चोरी के एक मामले में कार्रवाई से असंतुष्ट किसान द्वारा कोतवाली परिसर में जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किए जाने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए चौकी प्रभारी पर मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।

जानकारी के अनुसार ग्राम बमनपुरी निवासी राजेंद्र सिंह की तीन भैंसें 22 अप्रैल को चोरी हो गई थीं। मामले की शिकायत के बाद पुलिस ने कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी में प्रयुक्त एक पिकअप वाहन भी बरामद किया था। हालांकि भैंसों की बरामदगी नहीं हो सकी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस की ओर से लगातार भैंसें मिलने का भरोसा दिलाया जाता रहा, लेकिन बाद में उन्हें न्यायालय में मुकदमा लड़ने की बात कहकर टाल दिया गया।

मंगलवार को राजेंद्र सिंह कथित रूप से गदरपुर कोतवाली पहुंचे और वहीं जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर पुलिसकर्मियों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति को गंभीर बताते हुए उच्च केंद्र रेफर कर दिया।

पीड़ित की पत्नी सुमित्रा कौर ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान पुलिस ने कई बार जल्द बरामदगी का आश्वासन दिया था। उनका कहना है कि परिवार पूरी तरह पशुपालन पर निर्भर है और चोरी गई भैंसें ही आजीविका का मुख्य साधन थीं। भैंसों के न मिलने और लगातार निराशा के कारण राजेंद्र सिंह मानसिक रूप से टूट गए थे।

वहीं राजेंद्र सिंह के भाई भजन सिंह ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद पशुओं का कोई सुराग नहीं लग सका। उनका कहना है कि परिवार को उम्मीद थी कि चोरी गई भैंसें वापस मिल जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं होने से राजेंद्र सिंह गहरे सदमे में चले गए।

घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है तथा परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की भी पड़ताल की जाएगी।

भैंसें ही थीं परिवार की रोजी-रोटी”

“हमारी तीनों भैंसें ही परिवार की आय का मुख्य साधन थीं। पुलिस ने कई बार भरोसा दिलाया कि भैंसें जल्द बरामद हो जाएंगी, लेकिन समय बीतने के साथ उम्मीद टूटती चली गई। आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद पशुओं का कोई पता नहीं चला। परिवार का कहना है कि भैंसों की कीमत लाखों रुपये थी और उनसे ही घर का खर्च चलता था। परिजनों के अनुसार लगातार अनिश्चितता, आर्थिक नुकसान और न्याय की आस टूटने से राजेंद्र सिंह मानसिक दबाव में आ गए। इसी तनाव और निराशा के बीच उन्होंने कोतवाली परिसर में जहरीला पदार्थ खाकर आत्मघाती कदम उठा लिया।”

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