उत्तराखंड हाईकोर्ट का पुलिस को सख्त फरमान: जल्द शुरू करें FIR पोर्टल, वरना DGP हों पेश; 23 सितंबर को होगा ऐप का लाइव डेमो!

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस विभाग को लेकर एक महत्वपूर्ण मामले में कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश में मुकदमों की शिकायतों और FIR से जुड़े सार्वजनिक पोर्टल को बंद किए जाने के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।

​मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने पुलिस विभाग से सवाल किया है कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का अनुपालन क्यों नहीं किया जा रहा? सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि कोई भी केस दर्ज होने के बाद उसे सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाए, ताकि पीड़ित पक्ष और उनके वकील आसानी से जानकारी हासिल कर सकें। हालांकि, उत्तराखंड में पोर्टल बंद कर शिकायतकर्ताओं को सिर्फ ओटीपी (OTP) के जरिए सूचना दी जा रही थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सीधा उल्लंघन माना गया है।

​यह जनहित याचिका हरिद्वार की ‘नेशनल पब्लिक ट्रस्ट’ द्वारा दायर की गई है, जिसमें लंबे समय से बंद पड़े इस पोर्टल को फिर से शुरू करने की मांग की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि यह पोर्टल जल्द सुचारू रूप से शुरू नहीं हुआ, तो अगली सुनवाई पर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होना पड़ेगा।

​दूसरी ओर, उत्तराखंड पुलिस ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि पुरानी तकनीकी खामियों को दूर कर लिया गया है और अब आम नागरिक ‘सिटीजन पोर्टल’ व ‘देवभूमि मोबाइल ऐप’ के माध्यम से FIR डाउनलोड कर सकते हैं। हालांकि, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने सबूत पेश करते हुए बताया कि जब उन्होंने सुबह ऐप में लॉग इन करने की कोशिश की, तो वह काम नहीं कर रहा था।

​कोर्ट ने इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 23 सितंबर को अदालत में एक तकनीकी विशेषज्ञ को पेश किया जाए, जो जज साहब के सामने लाइव डेमो देकर यह साबित करे कि एप्लीकेशन सही तरीके से काम कर रही है और उससे FIR आसानी से डाउनलोड हो रही है।