काशीपुर। धार्मिक भावनाएं भड़काने और राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने के 14 साल पुराने मामले में काशीपुर की न्यायिक मजिस्ट्रेट राजेंद्र कुमार की अदालत ने दो मौजूदा विधायकों समेत सभी 24 आरोपितों के खिलाफ गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किए हैं। कोर्ट ने पुलिस को आरोपितों को गिरफ्तार कर पेश करने के निर्देश दिए हैं। वारंट जारी होने के बाद आरोपितों में खलबली मची है।
मामला 15 जुलाई 2012 का है। दूसरे समुदाय के युवक पर एक युवती को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का आरोप लगाते हुए भाजपा नेताओं और समर्थकों ने काशीपुर-जसपुर हाईवे पर जाम लगा दिया था। पुलिस ने इसे धार्मिक भावनाएं भड़काने और राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित करने का मामला मानते हुए जसपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया था।
तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक जेसी पाठक की ओर से दर्ज प्राथमिकी में गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय, जसपुर के तत्कालीन विधायक आदेश चौहान, किच्छा के तत्कालीन विधायक राजकुमार ठुकराल, काशीपुर के तत्कालीन विधायक हरभजन सिंह चीमा और पूर्व सांसद बलराज पासी समेत 24 लोगों को नामजद किया गया था। अन्य आरोपितों में जितेंद्र चौधरी, शीतल जोशी, अजय अग्रवाल, त्रिलोचन सिंह, सुखदेव सिंह, रमेश, रनजीत, सुखवीर, महाराज, सुन्नी, परविंदर उर्फ बंटी, अशोक, सुखबीर उर्फ पहलवान, राजीव, खिलेंदर चौधरी, हैप्पी उर्फ हरप्रीत सिंह, सीमा चौहान, नरेंद्र मानस और रनजीत शामिल हैं।
सरकार ने केस वापसी का किया था फैसला
मामले में नौ अक्टूबर 2014 को एसीजेएम काशीपुर ने चार्जशीट पर संज्ञान लेकर ट्रायल शुरू किया था। दो सितंबर 2019 को राज्य सरकार ने केस वापस लेने का निर्णय लिया। इसके बाद सहायक अभियोजन अधिकारी ने 20 सितंबर 2019 को अदालत में केस वापसी की अर्जी दाखिल की, लेकिन एसीजेएम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। आरोपितों ने जिला एवं सत्र न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली।
हाईकोर्ट ने जल्द ट्रायल पूरा करने को कहा
निचली अदालतों के आदेश को नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी की एकल पीठ ने 14 अगस्त 2026 को याचिका खारिज करते हुए कहा कि घटना वर्ष 2012 की है, इसलिए ट्रायल को शीघ्र पूरा किया जाए। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद ट्रायल कोर्ट ने सभी 24 आरोपितों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश करने के आदेश दिए हैं।
