मां ने सिखाई शतरंज की पहली चाल, 9 साल के शिवाय ने जीता फीडे रेटिंग खिताब।
रुद्रपुर। कोरोना महामारी के दौरान घर की चारदीवारी में मां के साथ शतरंज की बिसात पर चली पहली चाल आज नौ वर्षीय शिवाय सिंह को अंतरराष्ट्रीय पहचान की राह पर ले आई है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी निवासी शिवाय सिंह ने रुद्रपुर के मनोज सरकार स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित प्रथम धीरज सिंह मेमोरियल बिलो-1900 फीडे रेटिंग शतरंज प्रतियोगिता में करीब 300 खिलाड़ियों को पछाड़कर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।
चार दिनों तक चली प्रतियोगिता में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ नेपाल के खिलाड़ियों ने भी हिस्सा लिया। अंतिम राउंड तक रोमांच बरकरार रहा। शिवाय और पंजाब के युवराज सिंह ने नौ राउंड के बाद समान आठ अंक अर्जित किए, लेकिन फीडे के टाई-ब्रेक नियमों के आधार पर शिवाय को विजेता घोषित किया गया। इस उपलब्धि ने प्रतियोगिता में मौजूद खिलाड़ियों और दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
शिवाय की सफलता के पीछे उनकी मां की मेहनत और लगातार मिला प्रोत्साहन सबसे बड़ी ताकत रहा। शिवाय के पिता रवि प्रकाश सिंह, जो भारतीय रेलवे में कार्यरत हैं, बताते हैं कि कोरोना काल में जब पूरा परिवार घर पर था, तब शिवाय की मां ने समय बिताने के लिए उसके साथ शतरंज खेलना शुरू किया। धीरे-धीरे यह खेल उसकी रुचि और फिर जुनून बन गया। नियमित अभ्यास और परिवार के सहयोग ने उसकी प्रतिभा को निखार दिया।
वर्तमान में चौथी कक्षा में पढ़ने वाले शिवाय इससे पहले जयपुर में आयोजित राष्ट्रीय अंडर-7 बिलो-1800 प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल कर चुके हैं। रुद्रपुर में मिली इस बड़ी सफलता को वह अपने शतरंज करियर का अहम पड़ाव मानते हैं। शिवाय कहते हैं कि उनका सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना और विश्व मंच पर तिरंगा बुलंद करना है।
समापन समारोह में अपर जिला अधिकारी (प्रशासन) पंकज उपाध्याय ने विजेताओं को सम्मानित करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में शिवाय ने जिस परिपक्वता और रणनीति का परिचय दिया है, वह अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणा है। उन्होंने विश्वास जताया कि सही मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत के बल पर शिवाय भविष्य में देश के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगे। प्रतियोगिता में मिली इस जीत ने यह साबित कर दिया कि परिवार का सहयोग, मां की मेहनत और बच्चे का समर्पण मिलकर किसी भी सपने को हकीकत में बदल सकते हैं।




