16 साल बाद मिला 20 लाख का मुआवजा, हाईकोर्ट के आदेश पर फिर खुला 2009 का हादसा, ट्रेलर चालक के पास नहीं था वैध लाइसेंस, परमिट भी नहीं मिला; बीमा कंपनी पहले देगी रकम, बाद में वाहन स्वामी से करेगी वसूली

रुद्रपुर। 16 साल पहले सड़क हादसे में जान गंवाने वाले 28 वर्षीय रणजीत सिंह के परिवार को आखिरकार मुआवजे का हक मिला है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) एवं तृतीय अपर जिला जज मुकेश चंद्र आर्य की अदालत ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को मृतक के आश्रितों को 20 लाख दो हजार 800 रुपये प्रतिकर देने का आदेश दिया है। इस राशि पर सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा। अदालत ने भुगतान के लिए 45 दिन की समयसीमा तय की है।

 

मामला 19 नवंबर 2009 की रात का है। काशीपुर-बाजपुर मार्ग पर जैतपुर मोड़ के पास करीब साढ़े 12 बजे रणजीत सिंह मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे। इसी दौरान सामने से आए तेज रफ्तार ट्रेलर संख्या HR-55G-2322 ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल रणजीत की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। वह यूनिवर्सल फ्रेट कैरियर्स की काशीपुर शाखा में प्रबंधक थे।

 

मुआवजे के लिए दाखिल दावा याचिका को वर्ष 2013 में साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया गया था। इसके बाद मृतक की पत्नी रूबी देवी और अन्य परिजनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने निचली अदालत का आदेश निरस्त करते हुए एफआईआर, आरोपपत्र, नक्शा नजरी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत अतिरिक्त साक्ष्यों को रिकॉर्ड पर लिया और मामले को दोबारा गुण-दोष के आधार पर सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल भेज दिया।

 

पुनः सुनवाई में सामने आया कि दुर्घटना के समय ट्रेलर चालक भगत सिंह के पास वैध एवं प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। वाहन का उत्तराखंड में संचालन का वैध परमिट भी प्रस्तुत नहीं किया गया। इसे बीमा शर्तों का उल्लंघन मानते हुए अदालत ने ‘पे एंड रिकवर’ के सिद्धांत के तहत बीमा कंपनी को पहले मुआवजा देने और बाद में वाहन स्वामी पीटीसी क्लीयरिंग एंड फॉरवर्डिंग एजेंसी से नियमानुसार वसूली करने का आदेश दिया।