विशेष संवाददाता, पंजाबी सचवाणी
रुद्रपुर। पंजाबी महासभा की कार्यप्रणाली और संगठन के नाम को लेकर वरिष्ठ एडवोकेट और उधम सिंह नगर जिला बार के कोषाध्यक्ष कुलबीर ढिल्लों की सोशल मीडिया पोस्ट ने सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। ढिल्लों ने फेसबुक पर की गई पोस्ट में सवाल उठाया है कि यदि संगठन में पंजाबी समाज की सभी बिरादरियों को प्रतिनिधित्व नहीं मिलता, तो फिर संस्था के नाम और उसके व्यापक दायरे पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
कुलबीर ढिल्लों ने अपनी पोस्ट में लिखा, “अगर पंजाबी महासभा किसी जट सिख को या किसी अन्य पंजाबी बिरादरी को इसमें कोई पद नहीं दे सकती, तो पंजाबी महासभा का नाम बदलकर ‘खत्री महासभा’ रख दिया जाए।” उन्होंने इसे अपना निवेदन और सुझाव बताते हुए अन्य लोगों से भी इस विषय पर सुझाव देने की अपील की है।
ढिल्लों की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। पोस्ट में उठाए गए सवाल के केंद्र में पंजाबी समाज के विभिन्न समुदायों की संगठन में भागीदारी और प्रतिनिधित्व का मुद्दा है। चर्चा यह है कि यदि किसी संस्था के नाम में ‘पंजाबी’ शब्द शामिल है, तो उसके संगठनात्मक स्वरूप में समाज की अलग-अलग पंजाबी बिरादरियों की भागीदारी किस तरह सुनिश्चित की जाती है।
पोस्ट के बाद अब निगाहें पंजाबी महासभा की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। संगठन की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं, यह देखना होगा। वहीं, ढिल्लों के सवाल के बाद संगठन के प्रतिनिधित्व और संरचना को लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज हो गई है।
फिलहाल सोशल मीडिया पोस्ट ने पंजाबी महासभा के नाम, प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक दायरे को लेकर बहस को सामने ला दिया है। आने वाले दिनों में महासभा की ओर से इस पर क्या रुख अपनाया जाता है, इससे इस बहस की दिशा तय हो सकती है।
