रुद्रपुर। 5.50 लाख रुपये के चेक बाउंस मामले में विशेष न्यायालय एनआई एक्ट की अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रीतिका सेमवाल की अदालत ने आरोपी कुलदीप अरोरा को दोषी करार दिया है। अदालत ने उसे चार माह के साधारण कारावास की सजा सुनाने के साथ 5.55 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड में से 5.50 लाख रुपये परिवादी आकाश अग्रवाल को प्रतिकर के रूप में देने और पांच हजार रुपये राजकोष में जमा कराने के आदेश दिए गए हैं। अर्थदंड जमा नहीं करने पर दोषी को दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामला वर्ष 2017 का है। आवास विकास कॉलोनी निवासी आकाश अग्रवाल ने आर्थिक जरूरत के चलते कुलदीप अरोरा को 5.50 लाख रुपये उधार दिए थे। इसमें 11 अगस्त 2017 को तीन लाख रुपये बैंक चेक के माध्यम से दिए गए, जबकि 14 नवंबर को ई-बैंकिंग से 2.50 लाख रुपये का भुगतान किया गया था।
रकम वापस करने के लिए कुलदीप ने बैंक ऑफ बड़ौदा की सिडकुल पंतनगर शाखा का 5.50 लाख रुपये का चेक दिया। परिवादी ने चेक भुगतान के लिए बैंक में लगाया, लेकिन खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण चेक अनादरित हो गया। भुगतान की उम्मीद में चेक तीन बार प्रस्तुत किया गया, लेकिन हर बार रकम नहीं मिली। इसके बाद परिवादी ने कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं होने पर अदालत में शिकायत दर्ज कराई गई।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने रकम लौटाने का दावा किया, लेकिन इसके समर्थन में ठोस दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं कर सका। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कुलदीप अरोरा को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। फैसला आने के बाद उसका जमानत मुचलका निरस्त कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
