हिंसा से जुड़े गवाह धमकाने के मामले में अजय मिश्रा और आशीष मिश्रा को राहत, सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार ने कहा: जांच में नहीं मिली संलिप्तता, चार्जशीट भी नहीं।

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सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार का बड़ा बयान

नई दिल्ली। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले से जुड़े गवाहों को कथित रूप से डराने-धमकाने के प्रकरण में उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा और उनके बेटे आशीष मिश्रा को बड़ी राहत देने वाला पक्ष रखा है। गुरुवार को राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया कि जांच में दोनों की इस मामले में कोई भूमिका सामने नहीं आई है और उनके खिलाफ कोई आरोपपत्र भी दाखिल नहीं किया गया है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष राज्य सरकार ने कहा कि जांच के आधार पर अजय मिश्रा और आशीष मिश्रा के खिलाफ गवाहों को धमकाने के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। अदालत को यह भी बताया गया कि इस मामले की सुनवाई अगले तीन महीनों में पूरी होने की संभावना है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले में दाखिल नई स्थिति रिपोर्ट पर विचार किया और आशीष मिश्रा की जमानत याचिका पर फिलहाल सुनवाई टाल दी। अब इस मामले पर अगली सुनवाई अगले महीने होगी।

पीठ को यह भी बताया गया कि अमनदीप सिंह के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और संबंधित अदालत ने उसका संज्ञान भी ले लिया है।

गौरतलब है कि 3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया क्षेत्र में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में आठ लोगों की मौत हुई थी। आरोप है कि एक एसयूवी ने चार किसानों को कुचल दिया था। इसके बाद आक्रोशित किसानों ने वाहन चालक और भाजपा के दो कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। हिंसा के दौरान एक पत्रकार की भी जान गई थी। इसी प्रकरण से जुड़े गवाहों को कथित रूप से धमकाने के मामले की भी जांच की जा रही है।

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