उपभोक्ता अदालत का बड़ा फैसला, क्लेम खारिज करना बीमा कंपनी को पड़ा भारी, महिला को 2.14 लाख देने के आदेश

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रुद्रपुर (संवाददाता)। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, ऊधम सिंह नगर ने बीमा क्लेम को अनुचित ढंग से खारिज करने के मामले में दि न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के खिलाफ महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से सेवा में कमी मानते हुए पीड़ित महिला को 45 दिनों के भीतर कुल ₹2,14,500 का भुगतान करने का आदेश दिया है। इस राशि में वाहन क्षति का क्लेम, मानसिक उत्पीड़न का मुआवजा और वाद व्यय शामिल है।

मामले के अनुसार नैनीताल जिले के लालकुआं निवासी शांति देवी ने स्वरोजगार और परिवार के भरण-पोषण के लिए महिंद्रा मैक्सिमो वैन खरीदी थी। वाहन का बीमा दि न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी से कराया गया था। 22 फरवरी 2019 की रात सितारगंज-किच्छा मार्ग पर शॉर्ट-सर्किट के कारण वैन में अचानक आग लग गई, जिससे वाहन पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया।

दुर्घटना के बाद शांति देवी ने बीमा कंपनी से क्लेम किया, लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि पूर्व की बीमा पॉलिसी फर्जी थी और पुलिस की जनरल डायरी में वाहन का मॉडल ‘टाटा मैजिक’ दर्ज है। इसके बाद पीड़िता ने जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली।

आयोग के अध्यक्ष राजीव कुमार खरे, सदस्य नवीन चंद्र चंदोला और डॉ. मनीला की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि घटना के समय बीमा पॉलिसी पूरी तरह वैध थी। फायर सर्विस और सर्वेयर की रिपोर्ट में भी वाहन के आग से जलने की पुष्टि हुई। आयोग ने कहा कि पुलिस जीडी में हुई लिपिकीय त्रुटि को आधार बनाकर क्लेम अस्वीकार करना सेवा में गंभीर कमी है।

आयोग ने बीमा कंपनी को सर्वेयर रिपोर्ट के अनुसार ₹2,09,500 का वाहन क्षति क्लेम, ₹3,000 मानसिक उत्पीड़न के लिए तथा ₹2,000 मुकदमा खर्च के रूप में अदा करने के निर्देश दिए हैं। यह भुगतान आदेश की तिथि से 45 दिनों के भीतर करना होगा। यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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