रुद्रपुर। शहर में चल रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत शुक्रवार को रोडवेज बस अड्डे के निकट स्थित विश्कर्मा मार्केट में प्रशासन की कार्रवाई का व्यापारियों ने जमकर विरोध किया। प्रशासनिक टीम जेसीबी और कोतवाली पुलिस के साथ मौके पर पहुंची और दुकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। इसी दौरान दुकानदार और स्थानीय लोग विरोध में उतर आए। उनका आरोप था कि पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना उन्हें उजाड़ा जा रहा है, जबकि जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद उन्हें दुकानें खाली करने के लिए समय दिया गया था।
व्यापारियों का कहना था कि उन्होंने प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए दुकानें खाली करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इसके बावजूद अचानक जेसीबी चलाकर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे और गरीब दुकानदारों पर सख्ती दिखाई जा रही है, जबकि प्रभावशाली लोगों के अतिक्रमण पर प्रशासन नरम रवैया अपनाए हुए है।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का दावा था कि जिन दुकानों पर कार्रवाई की गई, वे सड़क के डिवाइडर से करीब 65 से 75 फीट दूर थीं और रोडवेज डिपो की बाउंड्री वॉल के बाहर स्थित थीं। उनका कहना था कि इन दुकानों से यातायात भी बाधित नहीं हो रहा था, फिर भी इन्हें हटा दिया गया। व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की कि जब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक कार्रवाई स्थगित की जाए।
कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारियों ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन कुछ समय तक व्यापारियों और प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक होती रही। बाद में प्रशासन ने निर्धारित क्षेत्र में कार्रवाई जारी रखी।
प्रशासन का कहना है कि शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने और नए बस टर्मिनल निर्माण के लिए यह कार्रवाई आवश्यक है। वहीं व्यापारियों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी वर्षों पुरानी रोजी-रोटी छीने जाने से पहले उनके पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
इनसेट | रोजी-रोटी का सवाल, कार्रवाई से पहले पुनर्वास की मांग
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान सबसे बड़ा सवाल छोटे कारोबारियों की आजीविका को लेकर उठता नजर आया। वर्षों से सड़क किनारे दुकान लगाकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले व्यापारियों का कहना है कि वे विकास कार्यों में बाधा नहीं बनना चाहते, लेकिन बिना वैकल्पिक स्थान दिए उन्हें हटा देना उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर देगा। उनका कहना है कि यदि प्रशासन पहले पुनर्वास की व्यवस्था कर देता, तो विरोध की नौबत ही नहीं आती। व्यापारियों ने मांग की कि विकास योजनाओं के साथ मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाया जाए, ताकि किसी का रोजगार छिनने की स्थिति पैदा न हो।




