रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर के शिक्षा विभाग ने सरकारी सेवा में अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों के खिलाफ दो महत्वपूर्ण कार्रवाइयां करते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि नियमों के उल्लंघन और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक ओर फर्जी टीईटी प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्ति पाने वाले सहायक अध्यापक को निलंबित किया गया है, वहीं वित्तीय अनियमितताओं के दोषी पाए गए प्रधानाध्यापक को दंडित करते हुए सशर्त बहाल किया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक शिक्षा) द्वारा जारी आदेश के अनुसार राजकीय प्राथमिक विद्यालय बन्नाखेड़ा, विकासखंड बाजपुर में कार्यरत सहायक अध्यापक सुधीर कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विभागीय जांच में सामने आया कि उन्होंने उत्तराखण्ड अध्यापक पात्रता परीक्षा (यूटीईटी)-प्रथम 2023 का कूटरचित प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर नियुक्ति प्राप्त की थी। उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर से प्राप्त रिपोर्ट में उनका परिणाम ‘नॉट क्वालिफाइड’ पाया गया। मामले को गंभीर धोखाधड़ी मानते हुए विभाग ने उन्हें उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय बाजपुर से संबद्ध कर दिया है तथा उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
वहीं दूसरी ओर राजकीय प्राथमिक विद्यालय नन्दपुर, विकासखंड गदरपुर के निलंबित प्रधानाध्यापक संजीव कुमार सिंह के विरुद्ध चली विभागीय जांच में वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप सिद्ध पाए गए। जांच में टीएलएम मद, जूता-बैग एवं गणवेश वितरण, स्टॉक रजिस्टर संधारण तथा विद्यालय प्रबंधन समिति की अनुमति के बिना धनराशि खर्च करने जैसी गंभीर खामियां सामने आईं। विभाग ने दंडस्वरूप उनकी एक वेतनवृद्धि संचयी प्रभाव से रोक दी तथा कड़ी चेतावनी जारी की है।
अनुशासनात्मक कार्रवाई पूर्ण होने के बाद संजीव कुमार सिंह को सेवा में बहाल करते हुए राजकीय प्राथमिक विद्यालय अलखदेवी, गदरपुर में तैनात किया गया है। शिक्षा विभाग की इन दोनों कार्रवाइयों को सरकारी तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



