रुद्रपुर/सितारगंज। वर्ष 2019 में सितारगंज क्षेत्र में हुई विवाहिता की संदिग्ध मौत के चर्चित दहेज हत्या मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मृतका के पति को दोषी करार दिया है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश चन्द्र आर्य की अदालत ने आरोपी हीरा लाल को दहेज मृत्यु के अपराध में सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं साक्ष्यों के अभाव में ससुराल पक्ष के चार अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया।
अभियोजन के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद निवासी अमृत लाल की बहन नेहा का विवाह 14 मई 2017 को सितारगंज क्षेत्र के वार्ड संख्या-8, चूना भट्टी निवासी हीरा लाल के साथ हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद से ही नेहा को अतिरिक्त दहेज और सोने के आभूषणों की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जाने लगा। आरोप था कि पति तथा ससुराल पक्ष के अन्य सदस्य उसे मानसिक एवं शारीरिक रूप से परेशान करते थे।
बताया गया कि फरवरी 2019 में नेहा ने एक बच्ची को जन्म दिया था। इसके कुछ समय बाद ही उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। घटना के बाद मृतका के भाई अमृत लाल ने ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने पति हीरा लाल, ससुर महेंद्र, सास सोमवती तथा ननद कंचन और आरती के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने आरोपों को सिद्ध करने के लिए कुल 18 गवाहों के बयान दर्ज कराए। न्यायालय ने गवाहों की गवाही, दस्तावेजी साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य प्रमाणों का परीक्षण करने के बाद पाया कि मृतका के प्रति दहेज को लेकर उत्पीड़न के आरोप पति हीरा लाल के विरुद्ध सिद्ध होते हैं। इसके आधार पर अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही आदेश दिया कि जेल में बिताई गई पूर्व अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। न्यायालय का यह फैसला दहेज प्रथा के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।




