अपहरण के मामले में नईम अहमद को 7 साल की कड़ी कैद, रुद्रपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने सुनाया फैसला, दुष्कर्म व पॉक्सो की धाराओं में साक्ष्य के अभाव में हुआ बरी

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​रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर)।

विशेष पॉक्सो और फास्ट ट्रैक कोर्ट (FTESC) की न्यायाधीश संगीता आर्य ने नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी नईम अहमद को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 363 (अपहरण) के तहत दोषी करार देते हुए 7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही मुजरिम पर 5,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है, जिसे अदा न करने पर उसे एक महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

​क्या था मामला

मामला सितंबर 2023 का है, जब थाना कुण्डा क्षेत्र के एक व्यक्ति ने तहरीर देकर शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी 13 वर्षीय नाबालिग पुत्री खेत में जानवरों को चारा डालने गई थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। ग्रामीणों से पता चला कि ग्राम सन्यासीवाला निवासी नईम अहमद लड़की को बहला-फुसलाकर कहीं ले गया है। पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू की और बाद में आरोपी के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप-पत्र दाखिल किया था。

​दुश्कर्म के आरोपों से मिली मुक्ति

सुनवाई के दौरान यह मामला तब पलट गया जब पीड़िता ने अदालत में बयान बदलते हुए कहा कि आरोपी नईम अहमद ने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया है। इसके अलावा डॉ. अल्पना मिश्रा की मेडिकल रिपोर्ट और फॉरेंसिक लैब (RFSL) की आख्या में भी पीड़िता के शरीर पर किसी भी प्रकार की चोट या दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हो सकी। साक्ष्यों के अभाव को देखते हुए अदालत ने आरोपी को दुष्कर्म (धारा 376), धारा 366ए और पॉक्सो अधिनियम (धारा 5/6) के आरोपों से संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

​सहमति का कोई विधिक मूल्य नहीं

न्यायालय ने स्कूल रिकॉर्ड और छात्र पंजिका के आधार पर माना कि घटना के वक्त पीड़िता की वास्तविक उम्र महज 12 वर्ष 8 महीने थी, जिससे उसका नाबालिग होना पूरी तरह साबित हुआ। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि कानूनन इतनी कम उम्र की बच्ची की सहमति का कोई विधिक मूल्य नहीं होता है। उसे माता-पिता (विधिक संरक्षक) की कस्टडी से दूर ले जाना सीधे तौर पर अपहरण की श्रेणी में आता है।

​भेजा गया जेल

फैसले के वक्त जमानत पर बाहर चल रहे आरोपी नईम अहमद को अदालत ने तुरंत कस्टडी में ले लिया। कोर्ट ने उसके व्यक्तिगत बंधपत्र और जमानतनामे निरस्त करते हुए उसे सजा काटने के लिए उप-कारागार हल्द्वानी (नैनीताल) भेज दिया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि ट्रायल के दौरान आरोपी द्वारा जेल में काटी गई 9 माह 5 दिन की अवधि को उसकी मूल सजा में से कम (मुजरा) किया जाएगा।

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