सात अक्तूबर को होगी किच्छा-सिरौलीकलां पालिका चुनाव की मतगणना
नैनीताल/किच्छा। किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव की मतगणना को लेकर चल रहा सियासी और कानूनी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने दोनों निकायों की मतगणना के लिए सात अक्तूबर की तारीख तय करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को मतगणना से जुड़ी पूरी रिपोर्ट शनिवार तक शपथपत्र के माध्यम से दाखिल करने को कहा है।
मामले में किच्छा निवासी अलीना मलिक समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने मतगणना टाले जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इससे पहले उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी मतगणना पर रोक लगाने संबंधी सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश पर सवाल उठाते हुए मतगणना शीघ्र कराने के निर्देश दिए थे।
कानून-व्यवस्था का हवाला देकर मांगा था समय
किच्छा और सिरौलीकलां में 22 सितंबर को मतदान हुआ था। मतदान के दौरान दोनों क्षेत्रों में हंगामा और तनाव की घटनाएं हुई थीं। इसके बाद राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए मतगणना के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मतपत्र स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखे गए हैं और शांतिपूर्ण तरीके से मतगणना कराने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है।
हालांकि, चुनाव के बाद मतपेटियों में बंद जनादेश की गिनती टलने को लेकर सवाल उठने लगे। हाईकोर्ट में भी याचिकाकर्ताओं ने मतगणना शीघ्र कराने की मांग की थी। 24 सितंबर को हाईकोर्ट ने मतगणना पर लगी रोक हटाते हुए कहा था कि जब चुनाव हो चुका है तो मतगणना रोकने का क्या औचित्य है।
63,831 मतदाताओं ने डाला था वोट
किच्छा और सिरौलीकलां में कुल 63,831 मतदाता थे। इनमें किच्छा के 52,240 और सिरौलीकलां के 11,591 मतदाता शामिल थे। चुनाव के बाद दोनों निकायों के अध्यक्ष और वार्ड सभासद प्रत्याशियों का फैसला मतपेटियों में बंद है।
अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दोनों निकायों के प्रत्याशियों और समर्थकों की निगाह सात अक्तूबर को होने वाली मतगणना पर टिक गई है। लंबे समय से स्ट्रांग रूम में बंद मतपेटियों से आखिरकार चुनावी नतीजे सामने आएंगे।
