लाइसेंस का हवाला देकर किसान का बीमा क्लेम खारिज करना गलत, कंपनी देगी तीन लाख

45 दिन में भुगतान के आदेश, छह प्रतिशत ब्याज के साथ मानसिक उत्पीड़न के लिए 10 हजार और वाद व्यय के पांच हजार रुपये भी देने होंगे

रुद्रपुर। सड़क दुर्घटना में किसान की मौत के बाद ड्राइविंग लाइसेंस न होने का हवाला देकर बीमा क्लेम खारिज करना न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी की सेवा में कमी मानते हुए मृतक किसान के कानूनी वारिसों को तीन लाख रुपये की बीमित राशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए 10 हजार और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये भी देने होंगे।

 

मामला नानकमत्ता निवासी सिमरजीत कौर के पुत्र अक्षदीप सिंह से जुड़ा है। अक्षदीप सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड, खटीमा के सदस्य थे। समिति ने अपने सदस्यों के लिए न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से सामूहिक व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पॉलिसी ली थी। 28 जुलाई 2021 की रात करीब 11:30 बजे अक्षदीप मोटरसाइकिल से खटीमा से नानकमत्ता लौट रहे थे। नानक सागर बैराज के पास पीछे से आई अनियंत्रित कार ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल अक्षदीप की तीन अगस्त 2021 को एम्स ऋषिकेश में उपचार के दौरान मौत हो गई।

 

परिजनों ने बीमा क्लेम प्रस्तुत किया, लेकिन कंपनी ने दुर्घटना के समय वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने का हवाला देकर दावा निरस्त कर दिया। इसके बाद सिमरजीत कौर ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया।

 

आयोग के अध्यक्ष राजीव कुमार खरे, सदस्य नवीन चन्द्र चन्दोला और सदस्या डॉ. मनीला की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि यह सामान्य वाहन बीमा नहीं, बल्कि किसानों की सामाजिक सुरक्षा के लिए ली गई सामूहिक व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पॉलिसी थी। बीमा कंपनी मृतक के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने की बात साबित नहीं कर सकी। ऐसे में केवल लाइसेंस की प्रति प्रस्तुत न किए जाने के आधार पर क्लेम खारिज करना उचित नहीं था।

 

आयोग ने कंपनी को आदेश जारी होने के 45 दिनों के भीतर तीन लाख रुपये पर 14 नवंबर 2022 से भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं करने पर ब्याज दर आठ प्रतिशत सालाना हो जाएगी। राशि कानूनी वारिसों को उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के बाद मिलेगी। समय पर पत्राचार करने के कारण गन्ना समिति के विरुद्ध परिवाद निरस्त कर दिया गया।