11 साल पुराने दहेज प्रताड़ना केस में पति दोषमुक्त, कोर्ट में बेनकाब हुए मारपीट और दहेज मांगने के आरोप, आरटीआई रिकॉर्ड और गवाहों के बयान बने अहम आधार

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रुद्रपुर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जयेन्द्र सिंह की अदालत ने 11 साल पुराने दहेज प्रताड़ना, मारपीट और धोखाधड़ी के चर्चित मामले में नितिन चौधरी को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा। मामले में पुलिसकर्मी महिला ने पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए थे।

 

मामले की शुरुआत वर्ष 2014 में महिला कांस्टेबल और बिजनौर निवासी नितिन की रजिस्टर्ड मैरिज से हुई थी। कंचन ने आरोप लगाया था कि नितिन ने खुद को सेना की पैरा रेजीमेंट में कैप्टन बताकर शादी की और बाद में दहेज के लिए प्रताड़ित किया। सितंबर 2015 में महिला हेल्पलाइन पहुंचने के बाद रुद्रपुर कोतवाली में पति समेत ससुराल पक्ष के छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।

 

विवेचना के दौरान पुलिस को एससी/एसटी एक्ट, धोखाधड़ी और अश्लील हरकत से जुड़े आरोपों के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। इन धाराओं को हटा दिया गया और नितिन के परिजनों के नाम भी केस से बाहर कर दिए गए। वर्ष 2018 में चार्जशीट दाखिल हुई। इसी दौरान दोनों पक्षों का तलाक भी आपसी सहमति से हो गया।

 

वर्ष 2022 में आरोप तय होने के बाद सुनवाई शुरू हुई। बचाव पक्ष ने अदालत में आरटीआई से प्राप्त रिकॉर्ड पेश किए। महिला ने 25 नवंबर 2014 को बिजनौर में बेल्ट से मारपीट का आरोप लगाया था, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार 24 से 26 नवंबर तक वह काशीपुर में आरटी सेट ड्यूटी पर तैनात थीं।

वहीं, पड़ोसी गवाह ने मारपीट या दहेज मांगने की घटना से अनभिज्ञता जताई। एलआईसी रिकॉर्ड में महिला की पॉलिसी में पति के रूप में ‘राजकुमार’ नाम दर्ज होने का तथ्य भी सामने आया।

इन साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत ने 17 अगस्त 2026 को नितिन चौधरी को धारा 498ए, 323 आईपीसी और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के आरोपों से बरी कर दिया।

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