रुद्रपुर। सितारगंज के शक्तिफार्म क्षेत्र में सूखी नदी तटबंध किनारे मिले सुशांत सरकार के शव के मामले में तृतीय अपर सत्र न्यायालय ने अभियुक्त विप्लव सरकार उर्फ रवि को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने हत्या, साक्ष्य मिटाने और अपहरण के आरोपों में दोषी ठहराते हुए कुल 12 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। हालांकि, फिरौती के लिए अपहरण के आरोप में उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
मामला जून 2020 का है। 26 जून को जेल कैंप क्षेत्र में बांस की झाड़ियों के नीचे एक अज्ञात युवक का खून से लथपथ शव मिला था। उसका चेहरा पत्थर से बुरी तरह कुचला गया था। पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर शिनाख्त के प्रयास शुरू किए। बाद में मृतक की पहचान पश्चिम बंगाल निवासी सुशांत सरकार के रूप में हुई।
जांच के दौरान पुलिस ने दिल्ली निवासी विप्लव सरकार को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त पत्थर, मृतक की टी-शर्ट सहित अन्य सामान बरामद किया था। विवेचना के बाद मामला अदालत पहुंचा, जहां अभियोजन पक्ष ने गवाहों, बरामदगी और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा।
तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश चंद्र आर्य की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विप्लव को हत्या का दोषी मानते हुए कठोर आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साक्ष्य मिटाने और अपहरण के आरोप में तीन-तीन साल का कठोर कारावास तथा एक-एक हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। जुर्माना अदा नहीं करने पर संबंधित अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। अदालत ने फिरौती के लिए अपहरण के आरोप में संदेह का लाभ देते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया।
