सैलजा की चिट्ठी के बाद भी जसपुर पहुंचे हरीश रावत, बोले- परिवार में ऐसी बातें होती रहती हैं, धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा को लेकर कांग्रेस में मतभेद

प्रदेश प्रभारी ने बिना संगठन से चर्चा किए कार्यक्रम आगे न बढ़ाने को कहा

जसपुर। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत की धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस में मतभेद सामने आए हैं। प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने रावत को पत्र भेजकर यात्रा को आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया था। इसके बावजूद रावत सोमवार को जसपुर पहुंचे और यात्रा को आगे बढ़ाया। यहां उन्होंने सैलजा की चिट्ठी को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि परिवार में सभी तरह की बातें होती रहती हैं और वह कांग्रेस के सिपाही हैं।

सैलजा ने अपने पत्र में कहा था कि रावत की यात्रा को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी या प्रदेश प्रभारी से चर्चा नहीं की गई। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की एकजुटता जरूरी है और ऐसे समय में समानांतर कार्यक्रम पार्टी के हित में नहीं होगा। उन्होंने रावत से यात्रा आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया था।

इसके बाद भी रावत ने जसपुर से अपनी यात्रा शुरू की। उनका कार्यक्रम जसपुर से काशीपुर, रामनगर और कालाढूंगी होते हुए हल्द्वानी तक जाने का है। रावत ने यात्रा को जनता से संवाद और कांग्रेस को मजबूत करने की कवायद बताया है।

बीमारी के बाद फिर सक्रिय हुए रावत

हरीश रावत लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी कारणों से सक्रिय राजनीति से दूर रहे। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने उत्तराखंड में दोबारा राजनीतिक गतिविधियां तेज कीं और धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा शुरू की। यह यात्रा हरिद्वार से शुरू होकर अब कुमाऊं के ऊधम सिंह नगर तक पहुंची है।

जसपुर में रावत ने कहा कि कांग्रेस के सभी नेता पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता हैं और राहुल गांधी के आदेश पर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि सभी अपने-अपने तरीके से पार्टी को मजबूत करने में जुटे हैं।

रावत ने कहा कि वह लंबे समय तक बीमार रहे। बीमारी के दौरान 20 से 22 हजार लोग उन्हें दिल्ली और गुरुग्राम देखने पहुंचे। उन्होंने कहा कि स्वस्थ होने के बाद उन्होंने भगवान का नाम लिया और उत्तराखंड लौटकर लोगों का धन्यवाद करने का निर्णय लिया। साथ ही उन्होंने ईडी और सीबीआई की चुनौती का सामना करने की बात भी कही।

सोमवार को रावत की यात्रा जसपुर से आगे बढ़ी। इसी बीच पार्टी नेतृत्व की आपत्ति के बावजूद यात्रा जारी रहने से कांग्रेस के भीतर संगठन और व्यक्तिगत राजनीतिक कार्यक्रम को लेकर बहस तेज हो गई है।