सड़क नहीं, डोली भी उठाने वाले कंधे कम पड़े, घायल बुजुर्ग महिला को तीन किमी तक डोली में लेकर चले ग्रामीण

पलायन ने गांव की रीढ़ तोड़ी; 100 में अब सिर्फ 38 परिवार

बेरीनाग। आजादी के 80 साल और राज्य गठन के 26 साल बाद भी पिथौरागढ़ के दूरस्थ गांव पभ्या में सड़क सुविधा सपना बनी हुई है। सड़क के अभाव में गांव पहले ही पलायन की मार झेल रहा है, अब हालात ऐसे हो गए हैं कि बीमार या घायल को अस्पताल पहुंचाने के लिए डोली उठाने वाले कंधे भी कम पड़ने लगे हैं। गुरुवार को 70 वर्षीय भागीरथी देवी बारिश में पैर फिसलने से घायल हो गईं। चलने में असमर्थ होने पर ग्रामीणों ने उन्हें डोली में बैठाया और करीब तीन किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद उन्हें सीएचसी बेरीनाग ले जाया गया।

ग्रामीणों के मुताबिक पभ्या में सड़क न होने से बीमारी, दुर्घटना और प्रसव की स्थिति में तीन किलोमीटर की पैदल दूरी सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। गांव में कभी करीब 100 परिवार रहते थे, लेकिन अब महज 38 परिवार बचे हैं। 62 परिवार पलायन कर चुके हैं। अधिकांश घरों में बुजुर्ग और महिलाएं ही रह गए हैं, जिससे आपात स्थिति में डोली उठाने के लिए पर्याप्त लोग जुटाना भी मुश्किल हो रहा है।

सड़क के साथ गांव पेयजल संकट से भी जूझ रहा है। वर्ष 1988 में 25 किलोमीटर दूर से बनाई गई पेयजल योजना जर्जर हो चुकी है। आपूर्ति बाधित होने पर ग्रामीणों को करीब तीन किलोमीटर दूर प्राकृतिक स्रोत से पानी ढोना पड़ता है।

ग्रामीण मनोज डोबाल ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान सड़क-पानी के वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में कोई गांव की सुध नहीं लेता। वहीं विधायक फकीर राम टम्टा ने बताया कि पभ्या के लिए पीएमजीएसवाई से सड़क स्वीकृत है और आगणन तैयार हो चुका है। टेंडर के बाद निर्माण शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।