रुद्रपुर (संवाददाता)। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) रुद्रपुर ने चार वर्ष पुराने सड़क हादसे के मामले में मृतक के परिजनों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। तृतीय अपर जिला जज एवं एमएसीटी के पीठासीन अधिकारी मुकेश चन्द्र आर्य की अदालत ने पीड़ित परिवार को 11,58,056 रुपये का प्रतिकर सात प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह राशि 45 दिनों के भीतर अधिकरण में जमा कराने के लिए बीमा कंपनी को निर्देशित किया है।
मामले के अनुसार ट्रांजिट कैंप क्षेत्र के वार्ड नंबर-8 निवासी 49 वर्षीय प्रेमशंकर 12 फरवरी 2022 की शाम दानपुर स्थित एक निजी कंपनी में ड्यूटी पर जा रहे थे। रुद्रपुर-काशीपुर मार्ग पर रेव सिनेमा के पास टेम्पो से उतरकर सड़क पार करते समय तेज रफ्तार ऑल्टो कार ने उन्हें टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल प्रेमशंकर को उपचार के लिए मुरादाबाद ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
दुर्घटना के बाद मृतक की पत्नी मीना देवी और पुत्र मनोज कुमार ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में 35.50 लाख रुपये के मुआवजे की याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने एफआईआर दर्ज होने में देरी और वाहन को झूठा फंसाने का तर्क दिया, लेकिन अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने पुलिस की चार्जशीट, घटनास्थल के नक्शे तथा प्रत्यक्षदर्शी गवाहों आनंद मंडल और मनोज सेन के बयानों को विश्वसनीय मानते हुए माना कि दुर्घटना कार चालक जगदीश सरकार की लापरवाही से हुई। न्यायालय ने यह भी पाया कि हादसे के समय वाहन के सभी आवश्यक दस्तावेज, बीमा और चालक का ड्राइविंग लाइसेंस वैध थे।
अदालत ने आदेश दिया कि स्वीकृत प्रतिकर राशि में से 9,58,056 रुपये मृतक की पत्नी मीना देवी तथा दो लाख रुपये पुत्र मनोज कुमार को दिए जाएं। तय अवधि में भुगतान नहीं होने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई भी की जा सकेगी। यह फैसला सड़क दुर्घटना पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




