रुद्रपुर। पहाड़गंज क्षेत्र में 11 वर्ष पहले हुए मारपीट और धारदार हथियार से हमले के चर्चित मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम विवेक सिंह राणा की अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने दामाद उदल कश्यप और उसकी मां रामवती को दोषी करार देते हुए उन्हें प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट का लाभ प्रदान किया है।
अभियोजन के अनुसार घटना 4 अगस्त 2015 की है। वादी बृजलाल ने अपनी पुत्री सरिता, जो सामने स्थित ससुराल में रहती थी, को घर के बाहर से आवाज दी थी। इसी बात से नाराज होकर दामाद उदल कश्यप, उसकी मां रामवती और भाई सूरजपाल (अब मृत) कथित रूप से लाठी-डंडे और धारदार हथियार लेकर बृजलाल के घर में घुस आए। आरोप है कि उन्होंने बृजलाल, उनकी पत्नी बीना और पुत्र दीपक पर हमला कर दिया, जिससे तीनों घायल हो गए।
मामले में थाना रुद्रपुर में आईपीसी की धारा 323, 324, 504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान सहायक अभियोजन अधिकारी बसंती गिरी ने चार गवाह पेश किए। पीड़ित पक्ष ने अदालत को बताया कि घटना में घायल हुए दीपक की हालत बाद में लगातार बिगड़ती गई और उसकी मृत्यु हो गई।
सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने उदल कश्यप और रामवती को धारा 323 और 324 के तहत दोषी माना। हालांकि गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी के आरोप पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में सिद्ध नहीं हो सके, जिस कारण दोनों को इन धाराओं से बरी कर दिया गया।
अदालत ने आदेश में कहा कि दोनों अभियुक्त प्रथम अपराधी हैं तथा पक्षकार आपस में रिश्तेदार हैं। ऐसे में सुधार का अवसर दिया जाना उचित होगा। कोर्ट ने दोनों को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और एक वर्ष तक शांति एवं सदाचार बनाए रखने की शर्त पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।




