बैंक की लापरवाही पड़ी भारी: 60 साल की महिला के खाते से काटी बीमा किस्त, अब देना होगा हर्जाना

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रुद्रपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, ऊधमसिंह नगर ने बैंक ऑफ बड़ौदा की लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए बैंक को परिवादी को मुआवजा और ब्याज सहित राशि लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने माना कि पात्रता आयु पूरी होने के बावजूद बैंक द्वारा ग्राहक के खाते से लगातार बीमा प्रीमियम काटना सेवा में गंभीर कमी है।

मामला रुद्रपुर निवासी बाबू राम कश्यप से जुड़ा है। उन्होंने आयोग में दायर परिवाद में बताया कि उनकी दादी स्वर्गीय लीला देवी का बचत खाता बैंक ऑफ बड़ौदा की गल्ला मंडी शाखा में था, जिसमें वह नामांकित थे। बैंक द्वारा वर्ष 2016 से प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के नाम पर खाते से लगातार प्रीमियम काटा जा रहा था।

परिवादी के अनुसार 07 जुलाई 2025 को लीला देवी की मृत्यु के बाद उन्होंने बीमा क्लेम के तहत दो लाख रुपये की मांग की, लेकिन बैंक की ओर से भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली।

मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष राजीव कुमार खरे, सदस्य नवीन चन्द्र चन्दोला और डॉ. मनीला की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि PMJJBY योजना में शामिल होने की अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष निर्धारित है, जबकि वर्ष 2016 में लीला देवी की उम्र लगभग 60 वर्ष थी। इसके बावजूद बैंक ने नियमों की अनदेखी करते हुए उनके खाते से वर्षों तक बीमा प्रीमियम काटा।

आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि बैंक द्वारा पात्रता की जांच किए बिना प्रीमियम काटना सेवा में स्पष्ट कमी है। हालांकि आयोग ने यह भी माना कि मृतका की मृत्यु प्राकृतिक थी और दुर्घटना का कोई प्रमाण नहीं मिला, इसलिए PMSBY योजना का लाभ देय नहीं बनता।

आयोग ने बैंक को आदेश दिया कि वह परिवादी को अवैध रूप से काटी गई ₹4,054 की राशि 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाए। साथ ही मानसिक उत्पीड़न के लिए ₹30,000 और वाद व्यय के रूप में ₹5,000 का भुगतान भी करे।

आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि बैंक 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन नहीं करता है तो पूरी देय राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।

इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में अहम माना जा रहा है। आयोग के निर्णय ने साफ संदेश दिया है कि बैंक ग्राहकों की पात्रता की जांच किए बिना सरकारी योजनाओं के नाम पर मनमानी कटौती नहीं कर सकते।

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