रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर)। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम विवेक सिंह राणा की अदालत ने वर्ष 2019 के एक पुराने ट्रैफिक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी मौ० असद को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने यह निर्णय अभियोजन पक्ष की गंभीर लापरवाही और साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफलता के आधार पर सुनाया।
मामला 10 जनवरी 2019 का है, जब गदरपुर थाना क्षेत्र के महतोष मोड़ पर पुलिस ने एक कार को रोककर चालक मौ० असद के पास आवश्यक दस्तावेज न होने का आरोप लगाया था। इसके बाद मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत चालान कर वाहन को सीज कर दिया गया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि लगभग 7 वर्षों तक चले इस मामले में अभियोजन पक्ष कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। न तो किसी गवाह का परीक्षण कराया गया और न ही चालानी रिपोर्ट तैयार करने वाले उपनिरीक्षक को अदालत में पेश किया गया। इस पर अदालत ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 101 का हवाला देते हुए कहा कि आरोप सिद्ध करने की जिम्मेदारी पूरी तरह अभियोजन पक्ष की होती है।
अदालत ने ‘त्वरित सुनवाई’ को अभियुक्त का मौलिक अधिकार बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय ‘हुसैन आरा खातून बनाम बिहार राज्य’ का उल्लेख किया। अंततः अभियोजन की विफलता के चलते 18 अप्रैल 2026 को आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।




