रुद्रपुर (उधम सिंह नगर)। जनपद के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (तृतीय अपर जिला जज) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सड़क हादसे का शिकार हुए 17 वर्षीय छात्र के परिजनों के पक्ष में बड़ा निर्णय सुनाया है। न्यायालय ने विपक्षी बीमा कंपनी, मैग्मा एचडीआई जनरल इंश्योरेन्स, को मृतक के माता-पिता और बहन को कुल 19,77,200 रुपये (उन्नीस लाख सतहत्तर हजार दो सौ रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, याचिका दायर करने की तिथि से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।
ट्यूशन से घर लौटते समय हुआ था दर्दनाक हादसा
मामले के अनुसार, 27 अक्टूबर 2021 की शाम करीब 6:30 बजे, ग्राम बरा निवासी शान्ति पाल गंगवार का पुत्र सिद्धांत गंगवार अपनी बहन संजना के साथ किच्छा से ट्यूशन पढ़कर साइकिल से वापस घर लौट रहा था। जैसे ही वे शक्तिफार्म मोड़ के पास पहुँचे, किच्छा की ओर से आ रहे एक स्वराज ट्रैक्टर (पंजीकरण संख्या-यू०के०-06ए.पी.-5330) के चालक ने वाहन को बड़ी लापरवाही और तेज गति से मोड़ा, जिससे सिद्धांत को जोरदार टक्कर लगी।
हादसे के बाद घायल सिद्धांत को तुरंत किच्छा के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से उसे गंभीर हालत में बरेली के श्री राममूर्ति स्मारक (SRMS) अस्पताल रेफर कर दिया गया। चार दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद, 31 अक्टूबर 2021 को सिद्धांत की मृत्यु हो गई।
बीमा कंपनी के तर्कों को कोर्ट ने नकारा
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने बचाव करते हुए तर्क दिया था कि दुर्घटना के 45 दिनों बाद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी, जिससे मामला संदिग्ध प्रतीत होता है। हालांकि, पीठासीन अधिकारी मुकेश चन्द्र आर्य ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि जब किसी परिवार का जवान बेटा अस्पताल में जीवन के लिए संघर्ष कर रहा हो, तो प्राथमिकता इलाज होती है न कि पुलिस रिपोर्ट। कोर्ट ने उच्चतम न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल एफआईआर में देरी मुआवजे के हक को खत्म नहीं कर सकती।




