नई दिल्ली। राघव चड्ढा को आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने और संसद में बोलने से रोके जाने के बाद सियासत तेज हो गई है। शुक्रवार सुबह जारी एक वीडियो संदेश में चड्ढा ने पार्टी के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें “खामोश जरूर किया गया है, लेकिन वे हारे नहीं हैं।”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा किए गए इस वीडियो में चड्ढा ने कहा कि उन्होंने हमेशा आम जनता से जुड़े मुद्दे संसद में उठाए हैं। उन्होंने सवाल किया, “क्या जनहित के मुद्दे उठाना कोई अपराध है? क्या मैंने कुछ गलत किया है?” उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी द्वारा राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर उन्हें बोलने से रोकने की बात समझ से परे है।
चड्ढा ने अपने संबोधन में दावा किया कि उन्होंने एयरपोर्ट पर महंगे खाने, ब्लिंकिट-जोमैटो डिलीवरी राइडर्स की समस्याएं, टोल प्लाजा और बैंक चार्जेस जैसी आम लोगों से जुड़ी परेशानियों को संसद में उठाया। उन्होंने अपने संदेश को ‘Silenced, Not Defeated’ शीर्षक देते हुए सीधे आम आदमी को संबोधित किया।
इससे एक दिन पहले भी चड्ढा ने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें उन्हें संसद में पैटरनिटी लीव, मिडिल क्लास पर टैक्स का बोझ, मोबाइल डेटा लिमिट, मिनिमम अकाउंट बैलेंस, फ्लाइट बैगेज चार्ज, पेपर लीक और वायु प्रदूषण जैसे मुद्दे उठाते हुए दिखाया गया।
वहीं, पार्टी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अनुराग ढांडा ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वे अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं और निडरता उनकी पहचान है। उन्होंने चड्ढा पर आरोप लगाया कि वे पिछले कुछ वर्षों से देश के असली मुद्दों पर बोलने से घबराते रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर मतभेदों की चर्चा को और तेज कर दिया है।



