पोस्टमार्टम न होने से 304A से बरी आरोपी, पर लापरवाही साबित; सत्र न्यायालय ने 279 व 337 में सजा बरकरार रखते हुए जेल भेजा

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रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर)। सत्र न्यायालय ने सड़क दुर्घटना के करीब एक दशक पुराने मामले में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी चालक नरोत्तम मंडल को धारा 304A (लापरवाही से मौत) के आरोप से बरी कर दिया है। हालांकि, अदालत ने उसे धारा 279 और 337 IPC के तहत दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।

मामला 29 सितंबर 2016 का है, जब किच्छा क्षेत्र में ट्रक संख्या UK06-CA-8853 ने मोटरसाइकिल को पीछे से टक्कर मार दी थी। हादसे में मोटरसाइकिल पर सवार सतेंद्र कौर गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, जिन्हें उपचार के लिए बरेली ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई। इस मामले में मृतका के पिता बलदेव सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी और वे मुख्य प्रत्यक्षदर्शी गवाह भी रहे।

निचली अदालत ने अगस्त 2024 में आरोपी को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। अपील की सुनवाई करते हुए सत्र न्यायाधीश सिकंद कुमार त्यागी ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि मृतका का न तो पंचनामा भरा गया और न ही पोस्टमार्टम कराया गया। अदालत ने कहा कि बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट के यह साबित करना संभव नहीं है कि मृत्यु का कारण दुर्घटना में आई चोटें ही थीं। ऐसे में केवल अनुमान के आधार पर धारा 304A के तहत दोषसिद्धि उचित नहीं मानी जा सकती। हालांकि, गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने यह माना कि आरोपी लापरवाहीपूर्वक वाहन चला रहा था, जिससे दुर्घटना हुई और पीड़िता घायल हुई। इसी आधार पर अदालत ने धारा 279 के तहत तीन माह का कठोर कारावास और ₹1000 जुर्माना तथा धारा 337 के तहत छह माह का कठोर कारावास और ₹500 जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी और आरोपी द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को समायोजित किया जाएगा। फैसले के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में लेकर हल्द्वानी जेल भेज दिया गया।

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