नाइट शिफ्ट में महिलाओं की जबरन ड्यूटी पर रोक: उत्तराखंड सरकार का सख्त फैसला, लिखित सहमति और सुरक्षा इंतजाम हुए अनिवार्य

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और कार्यस्थल पर समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है। बुधवार को हुई मंत्रिमंडल बैठक में दुकानों और प्रतिष्ठानों में महिलाओं की नाइट शिफ्ट ड्यूटी को लेकर महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दी गई। अब महिलाओं को रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट शिफ्ट में तभी काम कराया जा सकेगा, जब वह स्वयं इसकी लिखित सहमति देंगी। इससे महिलाओं पर जबरन नाइट ड्यूटी थोपने की प्रथा पर रोक लग सकेगी।

 

ध्यान देने योग्य है कि वर्ष 2022 में महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति तो दी गई थी, लेकिन कई संस्थान महिलाओं की इच्छाओं के विरुद्ध भी नाइट शिफ्ट में तैनाती कर रहे थे। लगातार सामने आ रही शिकायतों को देखते हुए सरकार ने अब नियमों को और सख्त कर दिया है।

 

नई व्यवस्था के तहत महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। किसी भी संस्थान में नाइट शिफ्ट के दौरान कम से कम तीन महिलाओं की संयुक्त ड्यूटी अनिवार्य होगी। किसी भी महिला को अकेले नाइट शिफ्ट में तैनात नहीं किया जा सकेगा। साथ ही महिलाओं के लिए अलग से विश्राम कक्ष और शिशु कक्ष की व्यवस्था तथा महिला शौचालय अनिवार्य कर दिया गया है।

 

इसके अलावा, नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए हर संस्थान में यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति का गठन भी जरूरी होगा। सरकार का कहना है कि यह नियम महिलाओं को सुरक्षित वातावरण में अधिक रोजगार अवसर प्रदान करेंगे और राज्य में महिला सशक्तिकरण को नई मजबूती देंगे।

 

सरकारी फैसला न केवल महिलाओं के हित में है, बल्कि कार्यस्थलों पर लैंगिक समानता को भी और अधिक मजबूत करेगा।

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