जरूरतमंदों के खाते खुलवाकर साइबर ठगी की रकम निकालता था गिरोह- पेट्रोल पंप की पीओएस मशीन पर एटीएम कार्ड स्वैप कर निकाले 72 हजार रुपये, सेल्समैन को मिलता था दो प्रतिशत कमीशन, कमरे से छह एटीएम कार्ड बरामद

रुद्रपुर। साइबर ठगी की रकम को बैंक खातों में मंगवाकर पेट्रोल पंप की मशीनों के जरिये नकदी में बदलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य जरूरतमंद लोगों को रुपयों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद एटीएम कार्ड अपने पास रखकर ठगी की रकम निकालते थे। पुलिस की जांच में दो पेट्रोल पंपों पर इस तरह करीब 72 हजार रुपये निकालने का मामला सामने आया है। इसमें पेट्रोल पंप के सेल्समैन को भी दो प्रतिशत कमीशन दिया जाता था।

 

पुलिस के अनुसार, साइबर सेल को गृह मंत्रालय की नोडल एजेंसी से एक संदिग्ध बैंक खाते की जानकारी मिली थी। जांच में यह खाता कोटा नारायणपुर निवासी अमन कुमार के नाम पर मिला। खाते में साइबर ठगी की रकम आने के बाद 24 अक्तूबर को नौ अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिये करीब 40 हजार रुपये सिद्धि फिलिंग स्टेशन की पीओएस मशीन से निकाले गए।

 

पूछताछ में सेल्समैन हरीश कुमार निवासी पहाड़गंज, रंपुरा ने बताया कि हैरी नाम का व्यक्ति उसे एटीएम कार्ड स्वैप करने के लिए देता था। इसके बदले उसे दो प्रतिशत कमीशन मिलता था। पुलिस ने अर्जुनपुर निवासी होशियार सिंह उर्फ हैरी को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसके कमरे से छह एटीएम कार्ड मिले। उसने जरूरतमंद लोगों को पैसे का लालच देकर खाते खुलवाने और उनके कार्ड हासिल करने की बात बताई।

 

पूछताछ में सात अक्तूबर को शिमला पिस्तौर स्थित भारत पेट्रोलियम पंप पर भी साथी के साथ कार्ड स्वैप कर 32 हजार रुपये निकालने की बात सामने आई। इस संबंध में गुजरात से साइबर शिकायत दर्ज मिली। वहीं, अमन के खाते से उत्तर प्रदेश, हरियाणा और कर्नाटक में दर्ज तीन साइबर ठगी की शिकायतें भी जुड़ी मिलीं। इनमें कुल 1.22 लाख रुपये से अधिक की ठगी का उल्लेख है। उपनिरीक्षक दीपक बहुगुणा की तहरीर पर अमन, हरीश और होशियार सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।