रुद्रपुर। चोरी की मोटरसाइकिल रखने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जयेंद्र सिंह की अदालत ने बृजेश तिवारी को नौ महीने के कारावास और तीन हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। हालांकि, अदालत ने उसे मोटरसाइकिल चोरी करने के आरोप से दोषमुक्त कर दिया। फौजदारी वाद संख्या 892/2020 में सुनाए गए फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियुक्त के खिलाफ चोरी का आरोप साबित नहीं हुआ, लेकिन उसके घर से चोरी की मोटरसाइकिल बरामद होने के आधार पर चोरी की संपत्ति रखने का अपराध सिद्ध हुआ। अभियुक्त पहले ही नौ महीने से अधिक समय न्यायिक अभिरक्षा में बिता चुका है, इसलिए जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित कर दिया गया। ऐसे में उसे अब अतिरिक्त कारावास नहीं भुगतना होगा।
मामला चार नवंबर 2019 का है। वादी अनिल कुमार ने अपनी हीरो स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल (यूके-04एस-4605) सिविल लाइंस, रुद्रपुर स्थित दुकान के बाहर लॉक करके खड़ी की थी। अगले दिन बाइक गायब मिली। काफी तलाश के बाद भी उसका पता नहीं चलने पर उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ चोरी का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
विवेचना के दौरान पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर काशीपुर रोड स्थित फ्लाईओवर के पास अश्विनी दुबे और संजय सिंह को पकड़ा। उनकी निशानदेही पर ग्राम संपतपुर निवासी बृजेश तिवारी के घर पहुंची पुलिस ने आंगन से पांच मोटरसाइकिलें बरामद कीं। इनमें अनिल कुमार की चोरी हुई बाइक भी शामिल थी।
अदालत ने गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद बृजेश तिवारी को भारतीय दंड संहिता की धारा 379 के आरोप से दोषमुक्त कर दिया, जबकि धारा 411 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने जुर्माना अदा नहीं करने पर 15 दिन के अतिरिक्त कारावास का आदेश भी दिया।
