रुद्रपुर। केंद्रीय कारागार सितारगंज में निरुद्ध बंदियों की समस्याओं, कानूनी जरूरतों और पुनर्वास की स्थिति का आकलन करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ममता पंत ने व्यक्तिगत साक्षात्कार किए। उच्चतम न्यायालय के सुभाष चकमा बनाम भारत संघ मामले में गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति के निर्देशों के अनुपालन में मुक्त सुधारात्मक संस्थान में यह प्रक्रिया शुरू की गई है।
उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में हुए भ्रमण के दौरान बंदियों की व्यक्तिगत और विधिक समस्याओं, सुधारात्मक गतिविधियों तथा समाज में दोबारा बसने की संभावनाओं से जुड़े पहलुओं की जानकारी जुटाई गई। इसका उद्देश्य बंदियों के अधिकारों के संरक्षण और उनके कल्याण के लिए जरूरी पहलुओं को समझना है।
इस दौरान विधि के विद्यार्थियों को कारागार की कार्यप्रणाली, बंदियों के संवैधानिक अधिकारों, निशुल्क कानूनी सहायता और विचाराधीन व सजायाफ्ता बंदियों की स्थिति से अवगत कराया गया। सचिव ममता पंत ने बंदियों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था का मकसद केवल सजा देना नहीं, बल्कि बंदियों में सकारात्मक बदलाव लाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है।
